वडोदरा (गुजरात): डिप्लोमॅटस इन डायलॉग 3.0 में विश्व भर के राजनीति, उच्च शिक्षा तथा सांस्कृतिक संवाद से जुड़े मान्यवर गुजरात के वडोदरा के पारूल विश्वविद्यालय में आए. इनमें राजदूत, उच्चायुक्त, राजनीतिक प्रतिनिधी, नीति निर्माण करनेवाले तथा वैश्विक शिक्षा के अग्रणि मान्यवर भी सम्मीलित हुए. इस कार्यक्रम में अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों को बढ़ावा देने में तथा सहयोग के अवसर उपलब्ध कराने में शिक्षा की भुमिका पर चर्चा की गई. विश्वविद्यालय ने एक सक्षम शैक्षिक मंच उपलब्ध किया जहाँ लोग, संकल्पनाएँ और संस्कृतियों का भौगोलिक सीमाओं को लाँघर कर संवाद हुआ और 75 से अधिक देशों के छात्र भी साथ आए.
इस संवाद में शैक्षिक और संस्थागत साझेदारियों में सुधार लाने के बारे में, छात्रों को अधिक व्यापक अवसर और एक्स्चेंज कार्यक्रम देने को ले कर और साझा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के बारे में तथा क्षमता वर्धन और ज्ञान को साझा करने के बारे में संवाद हुआ. चर्चाओं में शाश्वत विकास में शिक्षा की भुमिका के बारे में, वैश्विक नेतृत्व तथा सांस्कृतिक समझ के बारे में चर्चा की गई तथा राजनीतिक मिशन्स और उच्च शिक्षा संस्थानों में द्विपक्षीय और सामुहिक सहयोग की सम्भावनाओं के बारे में बातचीत हुई. इस संगोष्ठि मे झिम्बाब्वे, टान्झानिया, मोझाम्बिक, तिमोर- लेस्ट, फिलीस्तीन, सुदान, पापूआ न्यु गिनी, येमेन, कॅमेरून, ताजिकीस्तान, नुआरू, दक्षिण आफ्रिका, बेनिन, ब्युर्किना फासो, इथिओपिया, अल्जेरिया, अंगोला, भूतान, बुरूंडी, इक्वेडोर, इक्वेटोरियल गिनिया, एरिट्रिया, एस्वाटिनी, इंडोनेशिया, केन्या, लेसोथो, मादागास्कर, माली, मॉरिशिनिय, मंगोलिया, निकाराग्वे, नायजर, रिपब्लिक ऑफ गिनिया, सोलोमॉन आयलँडस, सोमालिया, श्रीलंका, सुरीनाम, टोगो, उगांडा तथा व्हेनेझुएला के राजनीतिक प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया. किस तरह अन्तरराष्ट्रीय साझेदारियाँ छात्र, संस्थान और समुदायों को वास्तविक अवसर दे सकते हैं, इसको ले कर विस्तार से संवाद हुआ.
इस कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर अतिथियों ने स्टॅच्यू ऑफ युनिटी की यात्रा की. यह ऐसा स्थान है जो राष्ट्रीय एकता, सामुहिक प्रगती तथा भारत के विकास में साझा व्हिजन की क्षमता दर्शाता है. लोग, संस्थान और देशों को समान हित के लिए साथ लाने का महत्त्व क्या है, इसके बारे में मन्थन के लिए यह भेंट अच्छा अवसर था. इस यात्रा में राजईतिक राउंडटेबल परिषदें, कैंपस विजिट, संस्थात्मक सहयोग और अन्तरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का भी समावेश था. पारूल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. देवांशू पटेल ने अन्तरराष्ट्रीय सहयोग का महत्त्व बताते हुए कहा, “साझी शिक्षा, आपसी समझ और सार्थक सहयोग के द्वारा देशों को साथ लाने की क्षमता शिक्षा में है. डिप्लोमॅटस इन डायलॉग के द्वारा हम ऐसे सेतु बनाने चाहते हं जो विश्व भर के छात्र, संस्थान और समुदायों को नए अवसर प्रदान करेंगे.”
पारूल विश्वविद्यालय के नव रात्रि उत्सव के अवसर पर इस अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठि में आए हुए 75 से अधिक देशों के 6000 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय छात्रों ने गुजरात के परंपरागत गरबा और दांडिया में सहभाग लिया और इस संवाद को और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की. इस उत्सव में डिप्लोमॅटस इन डायलॉग 3.0 के लिए उपस्थित मान्यवर अतिथियों ने दुनियाभर के छात्रों के साथ नव रात्रि के रंग, संगीत और परंपरा का आनंद लिया. झिम्बाब्वे, टान्झानिया, मोझांबिक, दक्षिण आफ्रिका, मालावी, लेसोथो, नेपाल, भूतान, म्यानमार, बांग्लादेश, पापूआ न्यु गिनी और फिजी समेत कई देशों के छात्रों ने विश्वविद्यालय के इस बहु सांस्कृतिक मंच में सहभाग लिया. इस अवसर पर बोलते हुए पारूल विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. पारूल पटेल ने कहा, “सांस्कृतिक समारोहों में विभिन्न पृष्ठभूमियों से आनेवाले व्यक्तियों को एक दूसरे को समझने के, एक दूसरे की परम्परा को समझने के तथा सरहदें पार करनेवाले दोस्ती के रिश्ते बनाने के लिए अच्छा अवसर मिलता है.”
डिप्लोमॅटस इन डायलॉग 3.0 का समारोह तथा पारूल विश्वविद्यालय नव रात्रि 2026 उत्सव में शैक्षिक सहयोग तथा सांस्कृतिक संवाद के द्वारा अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का विश्वविद्यालय का प्रयास अधोरेखित हुआ. शैक्षिक साझेदारियाँ, अनुसंधान से जुड़ा सहयोग और छात्रों के लिए व्यापक अवसर की ओर इससे संवाद हुआ. नव रात्रि के समारोह में अतिथि और छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक दर्शानेवाला अनुठा अनुभव मिला. पारूल विश्वविद्यालय ने संस्कृति और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बड़े अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को एक दूसरे के सामने लाया तथा शिक्षा, आपसी सम्मान और सांस्कृतिक समझ से जुड़े रिश्तों की नीव रखी. देशोंके बीच सार्थक रिश्तों का महत्त्व इसके द्वारा अधोरेखित किया गया.
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