जयपुर: पिछले दो सालों से चल रही जेडीए की कवायद के बावजूद भी जयपुर शहर का नया मास्टर प्लान बनाने के लिए फर्म का चयन नहीं हो पाया है. इसके चलते अब राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र समिति का गठन किया है जो नई मास्टर प्लान बनाने के लिए जारी की जाने वाले निविदा की नियम व शर्तें तय करेंगी.
जयपुर शहर का मौजूदा मास्टर प्लान 2025 वर्ष 2011 में 6 सितंबर को लागू किया गया था. इस मास्टर प्लान की वैधता पिछले वर्ष 5 सितंबर तक ही थी. जेडीए की ओर से दो साल पहले ही जेडीए रीजन का नया मास्टर प्लान बनाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई थी. लेकिन समय पर मास्टर प्लान तैयार नहीं होने के चलते जेडीए ने मास्टर प्लान 2025 की वैधता दो वर्ष के लिए बढ़ाकर सितंबर 2027 तक के लिए कर दी. आपको बताते हैं कि इन दो वर्षों में जेडीए ने नया मास्टर प्लान बनाने के लिए क्या किया और राज्य सरकार की ओर से किस प्रकार स्वतंत्र समिति का गठन किया गया है.
जेडीए ने दो साल पहले नया मास्टर प्लान बनाने की कवायद की थी शुरू
-पहली बार जारी की गई निविदा में एक ही फर्म ने दिया था प्रस्ताव
-दूसरी बार जारी की गई निविदा में आई 3 में से 1 फर्म हो पाई पात्र
-तीसरी बार जारी की निविदा में चार फर्मों ने दिए थे प्रस्ताव
-लेकिन बाद में नए मास्टर प्लान के तहत लॉजिस्टिक प्लान बनाना और
-पहाड़ी क्षेत्र को वर्गीकृत करने के चलते यह निविदा भी की गई निरस्त
-इसके चलते अब राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र समिति का किया है गठन
-इसको लेकर नगरीय विकास विभाग ने जारी किया आदेश
-यह समिति नए मास्टर प्लान की निविदा जारी करने के लिए करेगी तैयार
-ये कमेटी निविदा जारी करने के लिए तैयार करेगी RFP का प्रारूप
-request for proposal(RFP) का प्रारूप करेगी तैयार
-प्रमुख सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में गठित कमेटी में हैं शामिल
-कमेटी में स्वायत्त शासन सचिव,मुख्य नगर नियोजक राजस्थान,
-नगरीय विकास विभाग के मुख्य अभियंता,वित्तीय सलाहकार LSG,
-जेडीए के निदेशक विधि,वरिष्ठ नगर नियोजक UDH को किया है शामिल
-रूडसिको के मुख्य अभियंता अरूण व्यास को बनाया गया है सदस्य सचिव
-नगरीय विकास विभाग की ओर से इस बारे में जारी आदेश के मुताबिक
-समिति जेडीए की ओर से निर्धारित स्कोप ऑफ वर्क का करेगी परीक्षण
-यह सुनिश्चित करेगी की मूल आवश्यकताओं पर ध्यान किया जाए केंद्रित
-निविदा में मास्टर प्लान की मूल आवश्यकताओं पर ध्यान किया जाए केंद्रित
-नवीन निविदा में केन्द्र सरकार की अमृत योजना के नियमों के मुताबिक
-ड्रोन आधारित सर्वेक्षण,मोबाइल एप्लिकेशन और
-वेब पोर्टल के एकीकृत उपयोग पर किया जाएगा फोकस
-ये कमेटी निविदा जारी करने के लिए तैयार करेगी RFP का प्रारूप
-सरकार की ओर से कमेटी के तय किए गए कार्य व दायित्व के अनुसार
-निविदा में केवल वही फर्म पात्र मानी जाएगी जिसके पास समान अथवा
-तुलनीय क्षेत्रफल के मास्टर प्लान का कम से कम ड्राफ्ट बनाने हो अनुभव
-एकल/संचयी समान क्षेत्रफल का ड्राफ्ट मास्टर प्लान बनाने का हो अनुभव
-निविदा में भाग लेने के लिए नहीं रखी जाएंगी योग्यता की अत्यधिक कठोर शर्तें
-निविदा में तकनीकी दक्षता एवं समान कार्य अनुभव को दिया जाएगा वेटेज
-यह कमेटी प्रारूप तैयार करने के लिए ले सकेगी राय
-जरूरी होने पर विषय विशेषज्ञों से समिति ले सकेगी राय
-उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ले सकेगी प्रस्तुतीकरण
-देश-विदेश की फर्मों से प्राप्त कर सकेगी प्रस्तुतीकरण
-कमेटी की ओर से तैयार RFP प्रारूप पर ली जाएगी स्वीकृति
-नगरीय विकास मंत्री की स्वीकृति के बाद ही RFP किया जाएगा जारी
इस स्वतंत्र समिति के गठन के लिए नगरीय विकास विभाग की ओर से जो आदेश जारी किया गया है, उसमें जेडीए की ओर से अब तक की गई निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से गठित समिति में जेडीए को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देने को लेकर भी मामले के जानकार भी कई सवाल उठा रहे हैं.
राज्य सरकार का है मानना,जेडीए की निविदा प्रक्रिया रही है विवादस्पद
-नया मास्टर प्लान बनाने की निविदा प्रक्रिया रही है विवादास्पद
-निविदा में तय किए गए स्कोप ऑफ वर्क और
-अन्य तकनीकी शर्तें रही हैं बार-बार विवादास्पद
-इसके चलते पारदर्शिता एवं प्रतियोगिता दोनों हुई प्रभावित
-नगरीय विकास विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया यह सब
-इस आदेश के तहत सरकार ने गठित की है एक स्वतंत्र समिति
-निविदा का RFP तैयार करने के लिए गठित की है एक स्वतंत्र समिति
-इस आदेश के अनुसार
-भविष्य में विलंब एवं विवादों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए गठित की समिति
--जेडीए रीजन का मास्टर प्लान और जेडीए का ही नहीं पर्याप्त प्रतिनिधित्व!
-राज्य सरकार की गठित स्वतंत्र समिति में नहीं है पर्याप्त प्रतिनिधित्व
-नए मास्टर प्लान का RFP बनाने के लिए सरकार ने की है गठित
-प्रमुख सचिव यूडीएच की अध्यक्षता में गठित की है एक स्वतंत्र समिति
-इस समिति में ना तो जेडीए आयुक्त को किया गया है शामिल और
-नहीं जेडीए की नगर आयोजना शाखा से कोई अधिकारी है शामिल
-जेडीए से केवल निदेशक विधि को ही समिति में किया गया है शामिल
-ऐसे में मामले के जानकार उठा रहे हैं सवाल
-जो मास्टर प्लान जेडीए रीजन के लिए किया जाना है तैयार
-उसी मास्टर प्लान की अहम समिति में आखिर क्यों नहीं हैं जेडीए का पर्याप्त प्रतिनिधित्व?
-जेडीए ने तीन बार जारी की निविदा,इसके बावजूद नहीं हो पाया फर्म का चयन
-क्या इस कारण के चलते समिति में जेडीए को नहीं दिया पर्याप्त प्रतिनिधित्व?
-समिति के गठन के लिए जारी UDH के आदेश में भी यह कहा गया है
-"जेडीए की निविदा प्रक्रिया रही है विवादास्पद"
-"नया मास्टर प्लान बनाने की निविदा प्रक्रिया रही है विवादास्पद"
-"निविदा में तय किए गए स्कोप ऑफ वर्क और
-अन्य तकनीकी शर्तें रही हैं बार-बार विवादास्पद"
-"इसके चलते पारदर्शिता एवं प्रतियोगिता दोनों हुई प्रभावित"