VIDEO: दूसरे राज्यों से राजस्थान आने वाली बसों पर विभाग के अहम निर्देश, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: दूसरे राज्यों में पहले से पंजीकृत बसों को एनओसी लेकर राजस्थान लाने और यहां दोबारा पंजीकृत कराने वाले वाहन मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी बस को राजस्थान में नया पंजीयन चिन्ह मिलने मात्र से उस पर वर्तमान में लागू सभी नए नियम स्वतः प्रभावी नहीं माने जाएंगे. ऐसे मामलों में वाहन का मूल पंजीयन और पहली बार पंजीकरण की तारीख ही सबसे महत्वपूर्ण आधार होगी.

परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार यदि किसी बस का पहले किसी दूसरे राज्य में पंजीयन हुआ था और बाद में एनओसी प्राप्त कर उसे राजस्थान लाया गया, तो राजस्थान में नया पंजीयन नंबर जारी होने के बावजूद वाहन पर लागू प्रावधानों का निर्धारण उसके मूल पंजीयन की तारीख के आधार पर किया जाएगा. यानी वाहन को केवल इसलिए नए नियमों के दायरे में नहीं माना जाएगा कि उसका राजस्थान में पंजीयन बाद की तारीख में हुआ है.विभाग ने साफ किया है कि बस के परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि पहली बार जब वाहन का पंजीयन हुआ था, उस समय उस वाहन श्रेणी के लिए कौन से नियम और तकनीकी प्रावधान प्रभावी थे. 

परीक्षण और संबंधित प्रक्रिया उन्हीं प्रभावी प्रावधानों के अनुरूप की जाएगी. इससे उन बस मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके पुराने वाहनों को दूसरे राज्यों से एनओसी के माध्यम से राजस्थान लाकर पुनः पंजीकृत कराया जा रहा है.यह व्यवस्था केवल दूसरे राज्यों में पहली बार पंजीकृत बसों तक सीमित नहीं है. 

यदि कोई बस मूल रूप से राजस्थान में पंजीकृत थी, बाद में एनओसी लेकर दूसरे राज्य में गई और वहां उसका पंजीयन हुआ तथा बाद में एनओसी लेकर वापस राजस्थान लाई गई, तो उसके मामले में भी यही नियम लागू होंगे. ऐसी बस के राजस्थान में वापस आने पर उसके मूल स्वरूप, प्रथम पंजीयन की तारीख और उस समय प्रभावी प्रावधानों को आधार माना जाएगा. केवल दोबारा राजस्थान में पंजीयन होने की तारीख को आधार बनाकर वाहन पर वर्तमान के नए प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे.

परिवहन विभाग के इस स्पष्टीकरण से दूसरे राज्यों से पुरानी बसें खरीदकर राजस्थान में पंजीकृत कराने वाले वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है. अक्सर दूसरे राज्य से एनओसी लेकर आने वाले वाहनों को राजस्थान में नया पंजीयन चिन्ह मिलता है, जिसके कारण उनके ऊपर नए नियम लागू होने को लेकर असमंजस की स्थिति बनती रही है.

अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नया पंजीयन चिन्ह और वाहन की मूल पंजीयन तारीख दो अलग-अलग विषय हैं. नियमों के अनुपालन और परीक्षण के लिए मूल पंजीयन की तारीख को प्राथमिक आधार बनाया जाएगा.परिवहन विभाग के इस फैसले से पुराने वाहनों के पुनः पंजीयन को लेकर बनी भ्रम की स्थिति दूर होने की उम्मीद है. साथ ही, प्रदेश में एनओसी के जरिए आने-जाने वाले वाहनों के पंजीयन और परीक्षण प्रक्रिया में भी एकरूपता आने की संभावना है.