बड़े अस्पताल में "मा" योजना को लेकर नहीं गंभीरता ! 28 बड़े अस्पतालों के अधीक्षक/पीएमओ को कारण बताओ नोटिस, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः जनता को निशुल्क इलाज देने में महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर रही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA)में सरकारी अस्पतालों की बड़ी उदासीनता सामने आई है. चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 28 बड़े अस्पताल ऐसे चिन्हित किए है,जहां योजना में इलाज के दौरान नियमानुसार प्रक्रिया नहीं अपनाने के चलते 40 फीसदी तक क्लेम रिजेक्ट श्रेणी में चले गए. इस लापरवाही के चलते सरकार को करोड़ों के राजस्व के नुकसान का आंकलन है. ऐसे में अब विभाग ने अस्पतालों के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. पहले चरण में क्लेम रिजेक्शन को लेकर अस्पतालों के अधीक्षक/पीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए है. 

दरअसल, राजकीय हॉस्पिटल में MAA योजना में भर्ती होने वाले मरीजों की इलाज की राशि बीमा करने वाली कंपनी देती है. इसके लिए सरकारी हो या निजी अस्पताल, सभी जगह भर्ती मरीजों की डिटेल और डॉक्यूमेंट बीमा कंपनी को भेजनी अनिवार्य है. तमाम डॉक्यूमेंट और जरूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड होने के बाद बीमा कंपनी मरीज के इलाज में हुए खर्च की राशि को अस्पताल के खाते में ट्रांसफर करती है. शुरूआती चरण में देखा गया था कि सरकारी अस्पतालों में क्लेम पंजीकृत ही नहीं किए जाते है. लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद क्लेम पंजीकरण के काम में तो तेजी आई, लेकिन अब सरकारी हॉस्पिटलों में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से क्लेम रिजेक्ट के प्रकरण बढ़े है. प्रारम्भिक जांच में सामने आया है कि निर्धारित डॉक्यूमेंट और जानकारी अधूरी भेजने के कारण बीमा कंपनी क्लेम को रिजेक्ट कर रही है. प्रदेश के कई सरकारी हॉस्पिटल ऐसे है, जिनके 48 फीसदी से ज्यादा क्लेम रिजेक्ट हुए है. इसमें सिरोही के सरकारी मेडिकल कॉलेज से अटैच हॉस्पिटल का नाम प्रमुख है. जहां 48.38 फीसदी क्लेम जून 2025 से नवंबर 2025 के बीच रिजेक्ट हुए है, जिससे करीब 1.72 करोड़ रुपए की राशि सरकारी खजाने में नहीं आई. 

बड़े अस्पताल में "मा" योजना को लेकर नहीं गंभीरता !
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के "क्लेम रिजेक्शन" पर सख्ती
प्रदेश के 28 बड़े अस्पतालों के अधीक्षक/पीएमओ को कारण बताओ नोटिस
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने दिया कारण बताओ नोटिस
अकेले राजधानी जयपुर के चार बड़े अस्पतालों के अधीक्षकों को जारी नोटिस
एसआरके गोयल राजकीय हॉस्पिटल सेठी कॉलोनी,महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट,
सेटेलाइट हॉस्पिटल बनीपार्क अधीक्षक, जनाना हॉस्पिटल अधीक्षक से मांगा गया जवाब
करीब 30 से 40 फीसदी तक क्लेम रिजेक्शन को लेकर तीन दिन में मांगा जवाब
क्लेम रिजेक्शन के चलते करोड़ों रुपए की राजस्व हानि का जिक्र करते हुए मांगा गया जवाब

बीकानेर के अस्पतालों में "मा" योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही !
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के "क्लेम रिजेक्शन" पर प्रशासन की सख्ती
प्रदेश के 28 बड़े अस्पतालों के अधीक्षक/पीएमओ को कारण बताओ नोटिस
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने दिया कारण बताओ नोटिस
अकेले बीकानेर जिले में बीकानेर के पीबीएम चिल्ड्रंस हॉस्पिटल अधीक्षक,
शिव किशन मंदाराम दमामी गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ साइंसेज, एलाइड एण्ड न्यूरोसाइसेंज अधीक्षक
टीबी एण्ड चेस्ट हॉस्पिटल अधीक्षक, आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल अधीक्षक,
पीबीएम महिला हॉस्पिटल अधीक्षक, ईएनटी हॉस्पिटल अधीक्षक को जारी किया गया नोटिस
सभी अधीक्षकों को अगले तीन दिन में "क्लेम रिजेक्शन" के पीछे की वजह बताने के निर्देश
नोटिस का संतुष्ट जवाब नहीं दिए जाने पर अधीक्षकों पर गिर सकती कार्रवाई की गाज

सरकारी अस्पतालों में मा योजना के 48 फीसदी तक क्लेम रिजेक्ट !
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के "क्लेम रिजेक्शन" पर प्रशासन की सख्ती
प्रदेश के 28 बड़े अस्पतालों के अधीक्षक/पीएमओ को कारण बताओ नोटिस
सिरोही मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के पीएमओ, बाड़मेर राजकीय हॉस्पिटल अधीक्षक,
बूंदी राजकीय जिला चिकित्सालय के पीएमओ, शिवराज सिंह राजकीय हॉस्पिटल करौली के पीएमओ,
हनुमानगढ़ स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल राजकीय जिला अस्पताल के पीएमओ,
डूंगरपुर के श्री हरिदेव जोशी सामान्य चिकित्सालय अधीक्षक, धौलपुर के मंगलसिंह जिला अस्पताल पीएमओ,
चित्तौड़गढ़ के एमसीएच श्री सांवलिया जी राजकीय सामान्य चिकित्सालय पीएमओ,
सीकर स्थित राजकीय एस के चिकित्सालय अधीक्षक, भीलवाड़ा महात्मा गांधी हॉस्पिटल अधीक्षक,
अजमेर राजकीय महिला चिकित्सालय अधीक्षक,राजकीय सेटेलाइट हॉस्पिटल अधीक्षक
श्रीगंगानगर राजकीय जिला अस्पताल के पीएमओ, भरतपुर राज बहादुर मेमोरियल हॉस्पिटल अधीक्षक,
कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल अधीक्षक, सीएचसी सुलतानपुर चिकित्सा अधिकारी प्रभारी,
झालावाड़ स्थित श्री राजेन्द्र सामान्य चिकित्सालय अधीक्षक, एसएचकेबीएम जनाना हॉस्पिटल अधीक्षक को नोटिस
इन अस्पतालों में प्रशासनिक लापरवाही के चलते 48 फीसदी से अधिक क्लेम रिजेक्शन
क्लेम रिजेक्शन के चलते करोड़ों रुपए की राजस्व हानि का जिक्र करते हुए मांगा गया जवाब 

चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश कुमार गोयल की तरफ से जारी नोटिस को देखे तो बीकानेर जिले के सरकारी हॉस्पिटलों की हालत सर्वाधिक खराब है. यहां 6 ऐसे राजकीय हॉस्पिटल है जहां बीमा क्लेम की राशि 25 से लेकर 42 फीसदी तक है. चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर इस जिले के प्रभारी मंत्री भी है. यही नहीं राजधानी जयपुर में भी सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय, जनाना हॉस्पिटल चांदपोल, सेटेलाइट बनीपार्क और सेठी कॉलोनी के हॉस्पिटलों में भी क्लेम रिजेक्शन के केस बहुत ज्यादा है. विभागीय अधिकारियों की माने तो नोटिस के जवाब के परीक्षण के बाद जिम्मेदारों पर आगे एक्शन लिया जाएगा