जयपुर: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के बाद पुलिस मुख्यालय ने सफ़ाई दी है. PHQ ने दावा किया है कि राजस्थान में अपराधों की दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. वर्ष 2024 और 2025 में राज्य में अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है. यह सफलता राजस्थान पुलिस की पारदर्शी, निष्पक्ष और फ्री-रजिस्ट्रेशन नीति का परिणाम है, जिसके चलते अपराधों के दर्जीकरण और शिकायत निस्तारण में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है.
राजस्थान पुलिस ने अपराध नियंत्रण के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं. इनमें फ्री-रजिस्ट्रेशन पॉलिसी, शिकायतों का शीघ्र निस्तारण, अपराध विश्लेषण के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग और पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण शामिल है. इन पहलों के चलते आमजन का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है और अपराधियों में भय का वातावरण बना है.यदि वर्ष 2023 और 2024 की तुलना की जाए तो आंकड़े साफ तौर पर कमी दर्शाते हैं.
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के 45,450 मामलों की तुलना में वर्ष 2024 में 36,563 मुकदमे दर्ज हुए. अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 8,449 की तुलना में 7,008 मुकदमे सामने आए.अनुसूचित जाति के विरुद्ध अपराध भी 2,453 से घटकर 2,282 दर्ज हुए. आर्थिक अपराधों में भी गिरावट दिखी है, जहाँ 27,675 की तुलना में 27,637 अभियोग पंजीबद्ध हुए.आईपीसी/बीएनएस अपराधों के मामलों में 2,34,985 की तुलना में 2,13,352 मुकदमे दर्ज किए गए.
इन आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में कुल अपराध दर में पिछले दो वर्षों के दौरान 19.45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. यह गिरावट अपराध नियंत्रण के प्रति राजस्थान पुलिस की गंभीरता, आधुनिक तकनीक के उपयोग और त्वरित कार्रवाई का परिणाम है. राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी दर्ज होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में महिला अत्याचार प्रकरणों में 9.24 प्रतिशत की गिरावट आई है.
यह सकारात्मक बदलाव राजस्थान पुलिस की प्रतिबद्धता और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है. विशेषकर महिला सुरक्षा को लेकर चलाए गए विशेष अभियानों और सख्त कार्रवाई से यह गिरावट संभव हो सकी है.राज्य सरकार ने भी अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए कानून-व्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार संसाधन उपलब्ध कराए हैं.साइबर अपराधों से लेकर महिला सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में विशेष इकाइयाँ गठित की गईं और स्थानीय स्तर पर भी त्वरित कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई.