जयपुर : युवा विधि स्नातकों के लिए न्यायिक सेवा के द्वार खुले. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया. न्यायिक सेवा में प्रवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया. तीन साल की अनिवार्य वकालत की शर्त घटाकर एक साल की गई. चयनित अभ्यर्थियों को अब एक साल न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण लेना होगा. इसके बाद एक साल की संरचित क्लर्कशिप होगी.
संरचित क्लर्कशिप के पहले 6 माह प्रधान जिला न्यायाधीश या उच्च न्यायिक सेवा के न्यायाधीशों के अधीन होंगे. क्लर्कशिप के अगले 6 माह संबंधित हाईकोर्ट के सिटिंग जजों के अधीन काम करने का अवसर मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने बार के व्यावहारिक अनुभव और संस्थागत न्यायिक प्रशिक्षण के बीच नया संतुलन बनाया. अब न्यायिक दायित्व संभालने से पहले अभ्यर्थियों को कानून के साथ प्रक्रिया और न्यायिक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.
नई व्यवस्था से युवा और प्रतिभाशाली विधि स्नातकों के न्यायिक सेवा में प्रवेश का रास्ता आसान होगा. कानूनी ज्ञान, वकालत का अनुभव और न्यायिक प्रशिक्षण, तीनों के समन्वय से अधिक सक्षम न्यायिक अधिकारी तैयार होंगे. जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि न्यायिक परिपक्वता की दिशा में फैसला मील का पत्थर साबित होगा.