जयपुरः उदयपुर में SOG के एक एएसपी से जुड़े रिश्वतकांड के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG के कामकाज को लेकर बड़ा फैसला लिया है. पुलिस मुख्यालय ने SOG में लंबे समय से लंबित जमीन विवाद से जुड़ी जांचों की फाइलें वापस मांगी हैं. अब SOG इन मामलों की फाइलें जल्द से जल्द पुलिस मुख्यालय को लौटाएगी. इसके साथ ही भविष्य में जमीन विवाद से जुड़ी किसी नई जांच को SOG को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा.
दरअसल, उदयपुर में SOG के एएसपी से जुड़े मामले में उनके l दलाल को दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद पुलिस महकमे में इस पूरे प्रकरण को लेकर गंभीरता से मंथन हुआ. सामने आया कि रिश्वत की रकम जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में कार्रवाई के नाम पर मांगे जाने का आरोप था. इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने SOG में लंबित जमीन विवाद से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा शुरू की. पुलिस मुख्यालय की ओर से SOG में लंबे समय से लंबित उन मामलों की जानकारी और फाइलें मांगी गई हैं, जो जमीन विवाद से संबंधित हैं. अब ऐसी सभी फाइलों को SOG से वापस लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, SOG को इन मामलों को जल्द से जल्द PHQ को लौटाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद इन प्रकरणों की जांच किस एजेंसी या इकाई से कराई जाए, इसे लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर निर्णय लिया जाएगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले करीब एक साल से जमीन विवाद से जुड़ी कोई नई जांच SOG को ट्रांसफर नहीं की गई है. अब PHQ ने भविष्य के लिए भी यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीन विवाद से जुड़े मामलों को SOG की जांच के दायरे से बाहर रखा जाएगा.
पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को SOG के मूल कामकाज और उसकी विशेषज्ञता से जोड़कर भी देखा जा रहा है. SOG को संगठित और गंभीर अपराधों के साथ आर्थिक अपराध, साइबर तकनीक के इस्तेमाल से होने वाले अपराध और बड़े स्तर के अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की दिशा में जोर दिया जा रहा है.सूत्रों के अनुसार, डीजीपी ने SOG के अधिकारियों को आर्थिक अपराधों पर ज्यादा फोकस करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही नकल और पेपर लीक माफिया के खिलाफ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए प्रभावी कार्रवाई करने को भी कहा गया है.राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक तथा नकल के मामलों पर SOG की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. अब ऐसे मामलों में पारंपरिक जांच के साथ तकनीकी संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है. संदिग्धों के डिजिटल नेटवर्क, आपसी संपर्क और वित्तीय लेन-देन की तकनीकी जांच के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की रणनीति पर काम किया जाएगा. पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को SOG की कार्यप्रणाली और छवि को लेकर उठे सवालों के बीच सुधार की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. जमीन विवाद जैसे मामलों से SOG को अलग कर आर्थिक अपराध, संगठित अपराध, पेपर लीक और नकल माफिया जैसे मामलों पर फोकस बढ़ाने से जांच एजेंसी की विशेषज्ञ भूमिका को स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है.