VIDEO: कोचिंग हब की 23 संपत्तियों की ई-नीलामी, 1.05 करोड़ से 5.74 करोड़ तक आरक्षित मूल्य, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: कोचिंग हब की 23 संपत्तियों की ई-नीलामी, 1.05 करोड़ से 5.74 करोड़ तक आरक्षित मूल्य, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रताप नगर में विकसित कोचिंग हब को अब पूरी तरह सक्रिय करने की कवायद शुरू हो गई है. राजस्थान आवासन मंडल ने कोचिंग हब की संपत्तियों को ई-नीलामी के जरिए बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मंडल की ओर से जारी ई-ऑक्शन विज्ञापन के तहत टावर संख्या-1 में निर्मित विभिन्न संपत्तियों को खरीदने का मौका मिलेगा. माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के बाद कोचिंग संस्थानों के कोचिंग हब में शिफ्ट होने का रास्ता और मजबूत होगा. राजस्थान आवासन मंडल की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 23 सितंबर 2026 से 25 सितंबर 2026 तक ई-नीलामी आयोजित की जाएगी.

इस ई-ऑक्शन में टावर संख्या-1 की कुल 23 संपत्तियां शामिल की गई हैं. इन संपत्तियों के लिए निर्धारित न्यूनतम बोली मूल्य 1.05 करोड़ रुपए से लेकर 5.74 करोड़ रुपए तक रखा गया है. इच्छुक खरीदार निर्धारित प्रक्रिया के तहत ई-ऑक्शन में भाग ले सकेंगे. प्रताप नगर में विकसित कोचिंग हब का उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित कोचिंग संस्थानों को एक निर्धारित स्थान पर सुविधाएं उपलब्ध कराना है. 

कोचिंग हब में विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं. यहां फूड कोर्ट, शोरूम, केंद्रीय वातानुकूलित लाइब्रेरी, दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए जॉगिंग ट्रैक और बास्केटबॉल कोर्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं. ऐसे में कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी एक ही परिसर में पढ़ाई और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है.

ई-नीलामी में शामिल संपत्तियों के न्यूनतम बोली मूल्य अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं. सबसे कम न्यूनतम बोली मूल्य 1.05 करोड़ रुपए है, जबकि सबसे अधिक न्यूनतम बोली मूल्य 5.74 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है. इससे स्पष्ट है कि टावर संख्या-1 में शामिल संपत्तियों का आकार, उपयोग और स्थिति अलग-अलग होने के आधार पर उनके आरक्षित मूल्य तय किए गए हैं. आवासन मंडल की इस प्रक्रिया को कोचिंग हब को व्यावसायिक रूप से सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. संपत्तियों की बिक्री के बाद इनमें कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक गतिविधियां और विद्यार्थियों से जुड़ी अन्य सेवाएं शुरू होने की संभावना बढ़ेगी.

जयपुर में लंबे समय से बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं. इससे कई इलाकों में यातायात, पार्किंग और विद्यार्थियों की आवाजाही का दबाव भी रहता है. ऐसे में प्रताप नगर का कोचिंग हब कोचिंग गतिविधियों को एक निर्धारित परिसर में केंद्रित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. अब आवासन मंडल की ई-नीलामी प्रक्रिया के बाद यह देखना अहम होगा कि टावर संख्या-1 की 23 संपत्तियों को किस प्रकार की प्रतिक्रिया मिलती है और कितने संस्थान यहां अपनी गतिविधियां शुरू करने के लिए आगे आते हैं. यदि संपत्तियों की बिक्री और संचालन की प्रक्रिया सफल रहती है, तो आने वाले समय में कोचिंग हब जयपुर के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में शामिल हो सकता है.