जोधपुर : "पेन" नहीं चाहती युवा पीढ़ी, इसलिए "सिजेरियन" बढ़ रहे हैं. कोटा-बीकानेर के बाद जोधपुर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के प्रकरण को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर मीडिया ब्रीफिंग की. खींवसर ने कहा कि जोधपुर के सारे मामले अलग-अलग हैं.
फिलहाल 6 महिलाओं की तबीयत बिल्कुल ठीक है. एक को हाई डायबिटीज थी, जिसे गंभीर देखते हुए जोधपुर एम्स रैफर किया गया है. जबकि जोधपुर में भर्ती एक अन्य महिला को पीलिया की शिकायत है. उन्होंने कहा कि कोटा, बीकानेर और जोधपुर के प्रकरणों को जोड़ा नहीं जाना चाहिए.
इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि अस्पतालों में सिजेरियन केस बढ़ रहे है. आज की युवा पीढ़ी दर्द नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन मामले बढ़ रहे. इसमें भी अधिकांश वे होती है, जो किसी दूसरे सेंटर से रैफर होकर आती है. गंभीर हालत में धक्के खाकर हमारे अस्पतालों में मरीज आते हैं. ये हमारे सेंटरों के प्रति आमजन का विश्वास दर्शाता है.
उन्होंने आगे कहा कि सभी का चिकित्सकीय देखरेख में उपचार चल रहा है. मामला सामने आने के बाद पूरी गंभीरता बरती जा रही है. मैं खुद लगातार मामले की मॉनिटरिंग कर रहा हूं. बता दें कि 8 प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ गई. कोटा और बीकानेर के बाद जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल का मामला है. 20 जून को सभी की सिजेरियन डिलीवरी होने की सूचना है.
6 प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया और दो प्रसूताओं के किडनी खराब होने की सूचना मिली. दो प्रसूताओं की हालत गंभीर बताई जा रही है. दोनों को एमडीएम अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया. संक्रमण की आशंका के चलते ऑपरेशन थिएटर को सीज किया गया. दवाओं के लिए सैंपल गए. फिलहाल कॉलेज प्रशासन मामले की जांच करवा रहा है. जांच के बाद मामले में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.