रोडवेज तबादला नीति में बड़ा बदलाव, गंभीर बीमार कर्मचारियों को प्राथमिकता, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) मुख्यालय ने कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए तबादला नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं इस आदेश में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों, स्थायी दिव्यांगजन, विधवा व एकल महिला कर्मियों तथा विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं

रोडवेज मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार किसी भी कर्मचारी का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला होने के बाद सामान्यतः दो वर्ष तक उसी स्थान पर पुनः स्थानांतरण नहीं किया जाएगा. वहीं स्थानांतरण के लिए प्राथमिकता क्रम भी निर्धारित किया गया है, जिसमें कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट सर्जरी, डायलिसिस, लकवा व मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर्मचारियों को सबसे ऊपर रखा गया है. इसके अलावा किडनी या लिवर दान करने वाले कर्मचारियों को ऑपरेशन के बाद निर्धारित अवधि तक विशेष प्राथमिकता का लाभ मिलेगा.निगम ने स्थायी दिव्यांगजन के मामलों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया है. मानसिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, दृष्टिबाधित, मूक-बधिर तथा अन्य स्थायी दिव्यांगता श्रेणी के कर्मचारियों को मानवीय आधार पर स्थानांतरण में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही विधवा, एकल महिला, परित्यक्ता तथा अवयस्क संतानों की देखभाल कर रहे विधुर कर्मचारियों को भी प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है. राजकीय या निगम सेवा में कार्यरत पति-पत्नी यदि अलग-अलग जिलों में तैनात हैं तो यथासंभव उन्हें एक ही जिले में समायोजित करने का प्रयास किया जाएगा.  

परिचालकों के लिए भी अलग से उप-बिंदु निर्धारित किए गए हैं. ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता या गंभीर प्रकरणों में निलंबन झेलने वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं कि निर्धारित अवधि पूरी होने और जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही उन्हें अन्य जोन में स्थानांतरित किया जाएगा. साथ ही कुछ मामलों में तीन वर्ष तक उसी जोन में पुनः पदस्थापन पर रोक का प्रावधान भी किया गया है, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हो सके.निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के लिए आवेदन करते समय संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक प्रमाण पत्र, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में लागू 2010 व 2021 की स्थानांतरण नीति के प्रावधान यथावत प्रभावी रहेंगे और नए दिशा-निर्देश उसी के साथ लागू होंगे.रोडवेज मुख्यालय के इस निर्णय को कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. नई व्यवस्था से विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को मानवीय आधार पर सुविधा मिलने के साथ-साथ तबादला प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद जताई जा रही है.