लोकसभा में राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- अमेरिकी शर्तों पर समझौता करना शर्मनाक

लोकसभा में राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- अमेरिकी शर्तों पर समझौता करना शर्मनाक

नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाषण दिया. लंबे विवाद के बाद राहुल गांधी ने सदन को संबोधित किया. राहुल सदन में जब बोलने के लिए खड़े हुए तो कांग्रेसी सांसदों ने हंगामा किया उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए. विपक्षी सांसदों को समझाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू खड़े हुए.

उन्होंने कहा कि राहुल के बोलने की वित्त मंत्री को जानकारी नहीं थी. सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह पूरी तरह से सरेंडर है. यह एक ट्रेजेडी है क्योंकि यह सिर्फ़ प्राइम मिनिस्टर का सरेंडर नहीं है. उन्होंने 1.5 बिलियन इंडियंस का फ्यूचर सरेंडर कर दिया है. उन्होंने फ्यूचर इसलिए सरेंडर कर दिया है क्योंकि वह भाजपा के फाइनेंशियल आर्किटेक्चर को बचाना चाहते हैं, जिस पर यूनाइटेड स्टेट्स में केस चल रहा है.

हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है:
मैं इकोनॉमिक सर्वे देख रहा था. मुझे उसमें दो बातें मिलीं, ठोस बातें, गहरी बातें, जो मुझे पसंद आईं. पहली बात, कि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है. अमेरिका के दबदबे को चीन, रूस, और दूसरी ताकतें चुनौती दे रही हैं. दूसरी बात यह है कि हम एनर्जी और फाइनेंशियल हथियारों की दुनिया में रह रहे हैं. हम स्थिरता की दुनिया से अस्थिरता की दुनिया में जा रहे हैं. असल में हम युद्ध के दौर में जी रहे हैं.

हम अस्थिरता की दुनिया में जी रहे हैं:
आप देख सकते हैं कि यूक्रेन में युद्ध है, गाजा में युद्ध है, मिडिल ईस्ट में युद्ध है. ईरान में युद्ध का खतरा है, हमने ऑपरेशन सिंदूर किया. तो हम अस्थिरता की दुनिया में जी रहे हैं. डॉलर को चुनौती दी जा रही है, जैसा कि दूसरी तरफ मेरे दोस्त समझते हैं. मुख्य खेल यह है कि डॉलर को चुनौती दी जा रही है. US के दबदबे को चुनौती दी जा रही है. हम एक सुपरपावर वाली दुनिया से किसी नई दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं. जिसका हम सच में अंदाजा नहीं लगा सकते.

हम टैरिफ पर मजबूर हो गए हैं:
राहुल गांधी आगे कहते हैं कि बात यह है कि मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी समेत कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इंडिया-US ट्रेड डील पर साइन करेगा, जब तक कि उस पर कोई रोक न हो. हम टैरिफ पर मजबूर हो गए हैं, हमने अपना डेटा दे दिया है, डिजिटल ट्रेड नियमों पर कंट्रोल छोड़ दिया है, कोई डेटा लोकलाइज़ेशन नहीं है, USA में फ्री डेटा फ्लो है, डिजिटल टैक्स पर एक लिमिट है, कोई सोर्स कोड डिस्क्लोजर नहीं है, और 20 साल की टैक्स हॉलिडे है.