नई दिल्ली : विश्व दलहन दिवस आज है. सप्लीमेंट नहीं, दाल सेहत की असली ताकत है. पाउडर और सप्लीमेंट के दौर में दाल थाली से गायब होती जा रही है. दादी-नानी की रसोई में दाल सेहत का आधार थी. स्वाद नहीं, दाल शरीर की जरूरत देखकर पकाई जाती थी.
बीमारी से उबरने और ताकत बढ़ाने में दाल की अहम भूमिका है. आज दलहन दिवस पर सेहत को लेकर बड़ा सवाल है कि यूरोपियन जर्नल के अनुसार दाल खाने वालों में फाइबर और आयरन ज्यादा होता है. नियमित दाल सेवन से फोलेट और विटामिन E भी अधिक होता है.
2025 स्टडी: रोज दाल खाने से फाइबर सेवन 10% बढ़ता है. खराब कोलेस्ट्रॉल में भी करीब 10% तक की कमी आती है. फूड एंड कल्चरल रिसर्चर दिपाली खंडेलवाल ने बताया कि दाल हमारे भोजन की थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हमेशा से रही है. बदलते समय में उसका स्वरूप बदल गया है.
मिठाइयों या स्ट्रीट फूड में भी किसी न किसी रूप में दाल का उपयोग होता रहा है. हालांकि पारम्परिक रूप से थाली में इसका उपभोग पहले की तुलना में कम हुआ है. हम अपने फूड वॉक के जरिए लोगों को पारम्परिक भोजन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं.