जयपुर: कांग्रेस हाईकमान ने बिहार चुनाव में महागठबंधन की गांठ को सुलझाने के लिए अब अपने तजुर्बेकार नेता अशोक गहलोत को आगे कर दिया है.गहलोत ने आज बिहार कांग्रेस प्रभारी अल्लावरु के साथ लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ कईं मसलों पर अहम मंत्रणा की.इस मुलाकात के बाद गहलोत ने कहा अब महागठबंधन में सब ऑल इज़ वैल है और कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सारी स्थित क्लियर कर देंगे. हल्की सर्दी की दस्तक के साथ ही चुनाव के चलते बिहार में सियासी तपिश बढ़ गई है.
सीटों के बंटवारे का महागठबंधन में ऐसा पेंच फंसा कि करीब एक दर्जन सीटों पर राजेडी,कांग्रेस,वामदल औऱ वीआईपी पार्टी ने एक दूसरे के खिलाफ ही नामांकन दाखिल कर दिए.लिहाजा विवाद बढ़ता देखकर कांग्रेस हाईकमान ने अपने सबसे अनुभवी नेता अशोक गहलोत को अब आगे कर दिया है.हालांकि गहलोत को पार्टी ने बिहार चुनाव के चलते भूपेश बघेल औऱ अधीर रंजन चौधरी के साथ सीनियर पर्यवेक्षक पहले से बना रखा है, लेकिन जिस तरह सीटों की मारामारी को चलते महागठबंधन में गांठ फिर ज्यादा पड़ने लगी तो फिर तुरंत आलाकमान ने उसे सुलझाने की जिम्मेदारी अकेले अशोक गहलोत को सौंपी.हाईकमान के निर्देश मिलते ही गहलोत दिवाली के अगले दिन पटना जा पहुंचे.
बिहार चुनाव में कांग्रेस को संजीवनी देंगे अशोक गहलोत:
-अनुभव के चलते गहलोत को पहले बनाया आलाकमान ने पर्यवेक्षक
-अब महागठबंधन में पड़ी गांठ सुलझाने का गहलोत को मिला नया टास्क
-गहलोत ने प्रभारी अल्लावरु के साथ तुरंत संभाला मोर्चा
-लालू यादव के घर जाकर अशोक गहलोत ने की चर्चा
-घंटे भर से ज्यादा गहलोत ने लालू और तेजस्वी यादव से की मैराथन चर्चा
-लालू यादव औऱ तेजस्वी यादव अशोक गहलोत से चर्चा के बाद दिखे राजी
-मुलाकात के बाद अशोक गहलोत ने कहा
-महागठबंधन में है अब सब ऑल इज वैल
दरअसल महागठबंधन में कुछ सीटों को लेकर बिल्कुल सहमति नहीं बनी यहां तक कि आपस में बातचीत तक बंद हो गई.ऐसे में करीब 12 सीटों पर महागठबंधन में शामिल दलों ने एक दूसरे के खिलाफ नामांकन तक दाखिल कर डाले.माहौल ऐसा बन गया था जैसे चलते चुनाव में महागठबंधन टूट गया है, लेकिन अब सियासी जादूगर अशोक गहलोत के मोर्चा संभालने के बाद फिर सभी दल बातचीत की पटरी पर लौट आए हैं.मुलाकात के बाद गहलोत ने कहा कि महागठबंधन में कोई लड़ाई नहीं है.243 सीटों में से अगर कुछ जगह फैंडली फाइट हो सकती है तो उसमें कोई इश्यू नहीं है.
दरअसल अशोक गहलोत चुनावी रणनीति और जातिगत समीकरण साधने में माहिर है.वहीं गहलोत कईं राज्यों के प्रभारी और चुनावी पर्यवेक्षक भी रहे हैं.उनकी सियासी समझ का कोई मुकाबला नहीं है.लिहाजा बिहार के चलते चुनावी दंगल में महागठबंधन में पनपे विवाद के निपटारे की उन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई.अब अगर बिहार में महागठबंधन जीत जाता है तो यकीनन गहलोत का एक बार फिर सियासी कद बढ जाएगा.