जयपुर: राजस्थान कांग्रेस के अग्रिम संगठन जबरदस्त गुटबाजी के शिकार है. खासतौर से यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई गुटबाजी के चलते निष्क्रिय पड़े हैं. वहीं सेवादल भी प्रदेश अध्यक्ष बदलने की अटकलों के बीच सक्रिय नहीं देख रहा. ऐसे में इन संगठन की गतिविधियां एक तरह से ठप पड़ी है.
एक और मैन राजस्थान कांग्रेस जहां सदन से लेकर सड़क तक सक्रिय है. वहीं उसके अग्रिम संगठन पार्टी के दिशा निर्देशों पर खरा नहीं उतर रहे. कांग्रेस के तीन अग्रिम संगठन ग्राउंड पर बिल्कुल सक्रिय नहीं दिख रहे. यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवादल की स्थिति काफी चिंतनीय है. यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई की प्रदेश नेतृत्व कई बार दिल्ली शिकायत भी कर चुका है लेकिन फिर भी हालात जस के तस है. यहां तक की दोनों संगठनों की बैठक तक में पदाधिकारी नहीं आते. कईं बार नोटिस थमाए गए लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ.
राजस्थान कांग्रेस के अग्रिम संगठन गुटबाजी के शिकार
-यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई संगठन में नहीं सुधर रहे हालात
-गुटबाजी के चलते पिछले दिनों यूथ कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी हुई भंग
-अब तक यूथ कांग्रेस की नई टीम का नहीं हो पाया गठन
-बिना कार्यकारिणी के कारण यूथ कांग्रेस की गतिविधियां हुई प्रभावित
-एनएसयूआई संगठन में तो हालात है और ज्यादा खराब
-प्रदेश अध्यक्ष औऱ राष्ट्रीय अध्यक्ष मे आपस में बातचीत तक हुई बंद
-पिछले दिनों विनोद जाखड़ को ही थमा डाला था नोटिस
-निष्क्रिय को हटाने औऱ नए पदाधिकारी बनाने जैसे फैसले नहीं ले पा रहे जाखड
-वहीं सेवादल भी नए अध्यक्ष बनाने की चर्चाओं के चलते हुए सुस्त
यूथ कांग्रेस तीन गुटों में बंटने के चलते कह सकते है कि दिशाहीन हो चुका है. प्रभारी रंधावा औऱ पीसीसी चीफ कईं बार ऊपर इसको लेकर शिकायत भी कर चुके हैं. लेकिन फिर भी गुटबाजी के ब्रेक नहीं लग पा रहे. कईं दफा नोटिस थमा दिए पर फिर भी कुछ नहीं हुआ. यूथ कांग्रेस की राह पर अब एनएसयूआई चल पड़ी है. लिहाजा अग्रिम संगठनों की निष्क्रियता का कांग्रेस के लिए सियासी संदेश अच्छा नहीं जा रहा. लेकिन ताज्जुब की बात है इतना पानी बहने के बावजूद हाईकमान कोई सख्त एक्शन नहीं ले पा रहा है.
एक दौर होता था जब अग्रिम संगठन कांग्रेस की जान हुआ करते थे. यानि मैन कांग्रेस तोप होती थी तो अग्रिम संगठन उसमें बारूद का काम करते थे. लेकिन संगठन चुनाव के बाद यूथ कांग्रेस औऱ एनएसयूआई की धार कमजोर होती गई. वहीं लगातार हाशिए पर धकेलने के चलते सेवादल की भूमिका तिरंगा फहराने औऱ बैठकों में बंदोबस्त करने तक सीमित हो गई. कुल मिलाकर तीनों संगठनों का सिस्टम बदलने के लिए पार्टी को अब तुरंत सर्जरी करनी ही पड़ेगी.