खांसी की दवा से बढ़ता साइड इफेक्ट ! भरतपुर और श्री माधोपुर के बाद जयपुर में सामने आया प्रकरण, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः प्रदेश में बच्चों में खांसी की दवा के कारण साइड इफेक्ट के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है. भरतपुर और सीकर ज़िले के श्रीमाधोपुर के बाद जयपुर में भी डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप के उपयोग से एक बच्ची की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है. ऐसे में RMSCL प्रशासन ने आनन फानन में प्रदेशभर में सैंपल उठाने के साथ ही दवा के स्टॉक को होल्ड पर रखा है.

भरतपुर और सीकर ज़िले के श्रीमाधोपुर में डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप के उपयोग से कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले ने पूरे सिस्टम को सकते में डाल दिया है. हालांकि JK लोन अस्पताल में भर्ती इन बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया है. लेकिन अब जयपुर के एक निजी अस्पताल में एक दो साल की बच्ची को भर्ती किया गया और इस बच्ची को भी डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड दी गई थी, यह खाँसी की दवा सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाती है. इस मामले की जानकारी मिलते ही चिकित्सा विभाग ने फ़िलहाल इस दवा के बैच को होल्ड कर दिया है और चिकित्सा विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेज के औषधि प्रभारी और जिला औषधि भण्डार गृह को पत्र लिखा है और दवा की सप्लाई पर रोक लगा दी है, मामले को लेकर ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक का कहना है कि भरतपुर और सीकर जिले से कुछ ऐसे मामले सामने आए जिसमें खाँसी की दवा के उपयोग के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी है ऐसे में हमने तुरंत दवा के सैंपल उठाए और जाँच के लिए भेज दिए हैं. 

इस संवेदनशील मामले में चिकित्सकों का तर्क ये है कि जो खाँसी की दवा बच्चों को पिलाई गई है वह सिर्फ़ एडल्ट लोगों के इलाज में ही काम में आती है और जितने भी बच्चे इस दवा को लेने के बाद बीमार हुए हैं उनकी उम्र चार साल से कम है, लेकिन भरतपुर के जिस सरकारी अस्पताल में बच्चों को यह दवा दी गई वहाँ के एक चिकित्सक ने भी इस दवा का उपयोग किया और उसके बाद उस चिकित्सक की तबीयत भी बिगड़ गई, ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डेक्सट्रोमेथॉर फन हाइड्रोब्रोमाइड सीरप की पूरी सप्लाई पर रोक लगा दी गई है. विभिन्न बैचों के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.