जयपुर: कांग्रेस संगठन में अब बड़े बदलावों का काउंटडाउन शुरु हो चुका है. फेरबदल के तहत करीब आधा दर्जन राज्यों में पीसीसी चीफ बदले जा सकते है. वहीं करीब 7 राज्यों के प्रभारी भी चेंज किए जा सकते है. साथ ही कुछ महासचिव सहित भारी संख्या में मौजूदा सचिवों की भी छुट्टी हो सकती है.
झारखंड में कल दो सीटों पर राज्यसभा चुनाव समाप्त होने के बाद कांग्रेस संगठन में अब बड़े बदलाव देखने को मिल सकते है. लंबे समय से कांग्रेस हाईकमान इन बदलावों की कवायद में जुटा हुआ था. बताया जा रहा है अब एक्सरसाइज लगभग कंप्लीट हो चुकी है और फेरदबदल की सूचियां आने का काउंटडाउन शुरु हो चुका है. 20 जून के बाद बताया जा रहा है कभी भी सूचियां जारी की जा सकती है. सामने आ रहा है कि राज्यों से लेकर एआईसीसी में यह फेरबदल हो सकता है.
कांग्रेस संगठन में बड़े बदलावों का काउंटडाउन हुआ शुरु
-पीसीसी चीफ से लेकर AICC में होंगे कईं अहम फेरबदल
-करीब सात राज्यों के बदले जा सकते है प्रभारी
-महाराष्ट्र,तमिलनाडु,हरियाणा,गुजरात,असम और उत्तराखंड के चेंज हो सकते है इंचार्ज
-अगले साल पंजाब में चुनाव के चलते राजस्थान प्रभारी भी बदले जा सकते है
-सुखजिंदर रंधावा हाईकमान से अब पंजाब में काम करने की कर चुके है इच्छा जाहिर
-वहीं बड़ी संख्या में AICC सचिवों की हो सकती है छुट्टी
-कुछ महासचिव हटाने औऱ फिर नए जनरल सेक्रेटरी बनाने जैसे होंगे बदलाव
-करीब 5 से 6 राज्यों के बदले जा सकते है पीसीसी चीफ
-केरलम,पंजाब,तमिलनाडु,दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को मिल सकते है नए कप्तान
बताया जा रहा है कि बदलाव की सूची लगभग बनकर तैयार हो चुकी है. वॉर रूम टीम के जरिए हाईकमान ने सभी की परफॉर्मेंस रिपोर्ट भी तैयार कराई है. जैसे प्रभारी औऱ सचिवों ने अपने प्रभार वाले राज्यों के कितने दौरे किए,कितने प्रदर्शनों में वो शामिल हुए और कितनी टोटल बैठकों में हिस्सा लिया. इसमें चौंकाने वाला फैसला बड़ी संख्या में सचिवों को हटाना हो सकता है. वहीं दूसरा बड़ा बदलाव कुछ मौजूदा महासचिवों की छुट्टी होने और फिर नए चेहरों को चांस देना होगा. अब देखते है कि फेरबदल के तहत किन चेहरों पर गाज गिरती है.
एआईसीसी और पीसीसी में बदलाव के बाद अन्य जगह भी फेरबदल होंगे. अग्रिम संगठनों सहित विभागों औऱ प्रकोष्ठों में भी नियुक्ति का दौर शुरु होगा. कुल मिलाकर इस साल अब किसी भी राज्य में चुनाव नहीं है. लिहाजा एक बार फिर हाईकमान का फोकस अब संगठन मजबूती पर रहेगा. वहीं इस फेरबदल को अगले साल होने वाले राज्यों के चुनाव औऱ 20229 के लोकसभा चुनाव के समीकरणों को देखते हुए अंजाम दिया जाएगा.