जयपुर: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र में राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण और विनियमन विधेयक 2025 पर चर्चा हुईं. विधायक गोपाल शर्मा ने सदन में कहा कि ईस्टर्न एशिया में कोचिंग्स का बड़ा मायाजाल है. जापान में कहा गया है ऐसा नरक जो कर दे बेड़ा गर्क. नौकरी के लिए ऐसा मायाजाल है, जिससे एजुकेशन सिस्टम कॉलेप्स होता जा रहा है. राजस्थान में डबल इंजन की सरकार है. फिर कहां से सवाल आता है. सैकंडरी एजुकेशन के बाद कोचिंग में दाखिला ले सकेंगे. हमारा ये बिल कहीं मत्स्य न्याय का तो प्रतीक नहीं है कि छोटी मछली बड़ी मछली को खा जाती है. मंत्री से कहा कि पहली गलती पर 2 लाख दूसरी गलती पर 5 लाख. कोचिंग सेंटर्स का बड़ा मायाजाल है.
हर देश चीन, जापान, USA जैसे देश करते हैं कोचिंग सेंटर्स को कंट्रोल:
विधायक डॉ.सुभाष गर्ग ने राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण और विनियमन विधेयक 2025 पर कहा कि हर देश चीन, जापान, USA जैसे देश कोचिंग सेंटर्स को कंट्रोल करते हैं. यहां रेरा बनाया तो उसमें रिटायर लोगों को लेते हैं. यहां भी लिया जा सकता था. अधिकारियों को पता नहीं कोचिंग्स में क्या-क्या होता है. अधिकारियों पर गलत ड्राफ्ट का आरोप लगाया. ICW, CS,CA का भी जिक्र नहीं किया है. क्या आप फीस एक्ट को ही रेगुलेट कर पाए आज तक? आप जल्दबाजी में नहीं लेकर आएं. SOP जारी होते ही एक्शन लिया जाना चाहिए था. Suside पर कोई कंट्रोल नही कर पाएगा. जब तक अभिभावकों को नहीं जोड़ेंगे. इस बिल से कभी भी आत्महत्या खत्म नहीं हो सकेंगी. 35 हजार 950 छात्रों की आत्महत्या का उदाहरण दिया. इस बिल में उम्र की कोई सीमा नहीं रखी गई है.
बच्चा बनना चाहता है इंजीनियर और पिता कहते है नहीं डॉक्टर ही बनो:
कालीचरण सराफ ने सदन में कहा कि जो छात्र कोचिंग में पढ़ रहे हैं. निरंतर आत्महत्या में बढ़ोतरी हो रही है. बच्चा बनना चाहता है इंजीनियर और पिता कहते है नहीं डॉक्टर ही बनो. बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. आपको बता दें कि बजट सत्र में कोचिंग सेंटरों और उनकी फीस को लेकर गहन चर्चा हुई. विभिन्न सदस्यों ने बच्चों और उनके अभिभावकों पर बढ़ते मानसिक दबाव और फीस की समस्या पर चिंता जताई. नरेंद्र बुढ़ानिया ने सदन में कहा कि आजकल कोचिंग सेंटरों में बच्चों से सबसे अधिक फीस ली जा रही है, जो सबसे बड़ी और मूलभूत समस्या बन चुकी है.
फीस पर नियंत्रण का अधिकार नहीं:
प्राधिकरण के पास फीस पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है, और कोचिंग सेंटरों को युक्ति संगत फीस लेने का अधिकार दिया गया है, जो अनुचित है. सरकार को इस पर नियंत्रण लगाना चाहिए, क्योंकि कोचिंग सेंटर बच्चों से लूट रहे हैं और मानसिक दबाव भी बना रहे हैं. इसके कारण आम आदमी कर्ज ले रहा है और अपनी ज़मीन गिरवी रख रहा है.हरिमोहन शर्मा ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस विधेयक के आने से बच्चों की आत्महत्याएं रुक पाएंगी. बच्चों पर पेरेंट्स का मानसिक दबाव बहुत अधिक होता है. कई बार बच्चों की क्षमता और इच्छा के बावजूद, माता-पिता उन पर दबाव डालते हैं. हमें बच्चों की ग्रुपिंग पर ध्यान देना चाहिए.
होनहार विद्यार्थी फंस जाते हैं विज्ञापनों के फेर में:
अनिता भदेल ने कहा कि कोचिंग सेंटरों में बच्चों का IQ लेवल अच्छा हो जाता है, यही सोच कर अभिभावक उन्हें वहां भेजते हैं, लेकिन इससे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है. मेरा मानना है कि अभिभावकों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आत्महत्याओं को रोका जा सके. इस विधेयक में अभिभावकों का जिक्र नहीं है, जो होना चाहिए था. रामस्वरूप लाम्बा ने कहा कि होनहार विद्यार्थी विज्ञापनों के फेर में फंस जाते हैं और उन्हें वह परिणाम नहीं मिल पाता, जिसकी वे उम्मीद करते हैं. यह भी आत्महत्या के कारणों में शामिल है.