जयपुर : आबकारी विभाग भले ही अभियान चलाकर अवैध शराब की धरपकड़ और लगातार कार्रवाई के दावे कर रहा है, लेकिन राजस्व वसूली के आंकड़े खुलासा कर ही देते हैं कि फील्ड में जिम्मेदार अधिकारियों की पकड़ कमजोर हो चली है. अधिकतर जिले गारंटी, उठाव और निर्धारित राजस्व लक्ष्य में लगातार नीचे आ रहे हैं. नवंबर माह के आंकड़े आबकारी गारंटी को बड़ा झटका दे रहे हैं.
आबकारी विभाग ने जोन के हिसाब से जिला आबकारी अधिकारियों को मदिरा उठाव (आबकारी गारंटी) का टारगेट दे रखा है और उसी को आधार मानकर जिम्मेदारों की सीआर भी तय होती रही है. लेकिन पिछले कुछ माह से राजस्व वसूली के आंकड़ों में कमी दर्ज हो रही है. आबकारी आयुक्त की लगातार मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं. लेकिन कुछ जिले काम करने को तैयार ही नहीं. यही कारण है कि जयपुर शहर और ग्रामीण भी आबकारी शुल्क में पीछे चल रहे हैं.
जयपुर जोन में गारंटी के आंकड़े
जिला----------------अक्टूबर-----------नवंबर
अलवर--------------106.94------------98.84
बहरोड़--------------102.64------------98.85
दौसा----------------110.31-------------96.52
जयपुर सिटी--------103.67-------------96.53
जयपुर ग्रामीण------99.38---------------96.63
झुंझुनूं----------------113.42-------------106.38
सीकर---------------103.40-------------103.57
जोन के हिसाब से बात करें तो कमोबेश सभी जोन के कुछ जिले लगातार गिरावट दर्ज करवा रहे हैं. जयपुर जोन में नववंबर के दौरान करोड़ों की गारंटी कम रही. उधर, जिला आबकारी अधिकारी महिपाल सिंह चौधरी ने जिम्मेदारों की क्लास लगाई और नोटिस जारी करने की बात भी कही. देखने वाली बात यह रहेगी कि दिसंबर के आंकड़ों में सुधार होगा तभी माना जा सकता है कि राजस्व को लेकर लग रही क्लास का जिम्मेदारों पर असर दिखाई दे रहा है.