जयपुरः प्रदेश में जन्मजात दिल की बीमारी लेकर पैदा होने वाले बच्चों को अब इलाज के लिए निजी अस्पतालों में इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मासूम बच्चों की दर्ददायी पीड़ा को समझते हुए जेके लोन अस्पताल में पीडियाट्रिक सीटीवीएस यूनिट की बड़ी सौगात दी है. इस उपलब्धि के बाद जेके लोन प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी हॉस्पिटल बन गया है जहां बच्चों के दिल की बीमारियों का हर तरह का इलाज हो सकेगा.
ये है वो मासूम, जिन्हें "जिन्दगी" के साथ ही मिला है दिल का दर्द. इन मासूमों ने होश संभाला तो परिजनों की खुशी कुछ पल में ही गम में तब्दील हो गई. हो भी क्यों नहीं, ये बच्चे जन्म के साथ ही दिल की गंभीर बीमारी जो साथ लेकर आए. लेकिन अब ऐसे बच्चे इलाज के अभाव में मौत का ग्रास नहीं बनेंगे. ये सबकुछ संभव होगा सीएम भजनलाल शर्मा की पहल पर जेके लोन अस्पताल में शुरू की गई पीडियाट्रिक सीटीवीएस यूनिट से. अस्पताल में इमरजेंसी के ऊपर पहली पीडियाट्रिक सीटीवीएस यूनिट बनाई है, जहां बच्चों के हार्ट में छेद से लेकर हार्ट फेल्योर तक का इलाज होगा. जेके लोन में इस सीटीवीएस यूनिट के लिए आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) ने फंड किया है.
निजी अस्पतालों से भी आगे निकला जेके लोन
जेके लोन में पीडियाट्रिक सीटीवीएस यूनिट की शुरूआत से जुड़ी खबर
पीडियाट्रिक सीटीवीएस यूनिट में 80 बेड निर्धारित किए गए है
इसमें 10 आईसीयू, 5 एचडीयू और 65 बेड का वार्ड है
किसी भी निजी अस्पताल में सीटीवीएस की इतनी बड़ी यूनिट नहीं है
आरयूएचएस में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के बाद चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, स्वास्थ्य मंत्रालय की अति.सचिव रोली सिंह, प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड, चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान, फूड एण्ड ड्रग कमिश्नर डॉ शुभमंगला, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी पहुंचे. उन्होंने अस्पताल में यूनिट का विधिवत फीता काटकर उद्घाटन किया. इस मौके पर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि जन्मजात दिल की बीमारी लेकर पैदा होने वाले बच्चों की पीड़ा काफी मार्मिक है. सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया है. अब ऐसे बच्चों को सरकारी तंत्र में निशुल्क इलाज मिल सकेगा. सीटीवीएस की प्रोफेसर डॉ. हेमलता वर्मा ने बताया कि अभी जेके लोन में हर दिन ही पांच से छह केस कार्डियक डिजीज के आते हैं और उन्हें इलाज के लिए एसएमएस भेजा जाता है. अब जबकि एसएमएस अस्पताल में ही पेशेंट का काफी अधिक लोड है तो बच्चों के इलाज में काफी समय लगता है. लेकिन अब इस यूनिट के बनने के बाद अस्पताल में तुरंत ही कार्डियक सर्जरी हो सकेंगी और मौतों पर अंकुश लग सकेगा.
अत्याधुनिक तकनीक की सीटीवीएस यूनिट
सीटीवीएस यूनिट में एक कैथ लैब, मॉडयूलर ओटी, हाइली एडवांस रोबोटिक कैथलैब है
साथ ही बच्चों के लिए नियोनेटल रेडिएंट वार्मर व अन्य सुविधाएं हैं
चिकित्सकों के मुताबिक अभी एसएमएस में बच्चों की सर्जरी के दौरान कई बार हार्ट अटैक आ जाता है
हार्ट फेल्योर की स्थिति में कई बार विकल्प नहीं बचता और बच्चों को बचा पाना मुश्किल हो जाता है
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब हार्ट सर्जरी करने के दौरान भी हार्ट अटैक आता है तो तुरंत ही एंजियोग्राफी की जा सकेगी
यूनिट के लिए जो इक्युपमेंट खरीदे गए हैं वे नियोनेटल स्पेसिफिक हैं.
यूनिट बनने से हार्ट में छेद, वॉल्व रिप्लेसमेंट, वाल्व में खराबी, हार्ट चेंबर में छेद, ऑर्टरी का पतला होना,
हार्ट फ्लो में परेशानी आने वाले केस, हार्ट का कम डवलपमेंट वाले केस, दोनों ऑर्टरी का उल्टी होना,
एबनार्मल धड़कन, कंपलीट हार्ट फेल्योर, हार्ट इंफेक्शन समेत कई तरह की बीमारियों का मिलेगा इलाज