जयपुर: परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देश पर अब ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADT) वाले जिलों के पिन कोड लॉक कर दिए गए हैं. इस व्यवस्था के लागू होते ही जयपुर RTO प्रथम के क्षेत्राधिकार में आने वाले आवेदक अब RTO सेकंड या अन्य कार्यालयों में जाकर लाइसेंस संबंधी सेवाएं नहीं ले सकेंगे. दरअसल, जयपुर में जगतपुरा स्थित ऑटोमेटेड ट्रैक शुरू होने के बाद विभाग को यह शिकायत मिल रही थी कि बड़ी संख्या में आवेदक-विशेषकर दलालों के माध्यम से-दूसरे आरटीओ कार्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं.
इसका सीधा असर यह हुआ कि जहां एक ओर ऑटोमेटेड ट्रैक पर लाइसेंस जारी करने की संख्या बेहद कम रही, वहीं अन्य कार्यालयों में लाइसेंस की संख्या असामान्य रूप से बढ़ गई. आंकड़े इस स्थिति को साफ बयां करते हैं. पिछले 2 माह में जयपुर जिले के अन्य RTO कार्यालयों में 25 हजार से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जबकि जगतपुरा स्थित ऑटोमेटेड ट्रैक पर यह संख्या महज 1640 रही. यह अंतर न केवल प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि रोड सेफ्टी के उद्देश्य को भी कमजोर करता है. इस गंभीर विसंगति को देखते हुए जयपुर RTO राजेंद्र सिंह शेखावत ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था. उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि ऑटोमेटेड ट्रैक की अनिवार्यता के बावजूद आवेदकों का दूसरे कार्यालयों में जाना नियमों की मंशा के विपरीत है और इससे दलालों की भूमिका बढ़ रही है.
इसी के बाद परिवहन आयुक्त ने सख्त कदम उठाते हुए पिन कोड लॉकिंग की व्यवस्था लागू कर दी. अब प्रत्येक आवेदक को अपने क्षेत्राधिकार वाले RTO कार्यालय में ही सेवाएं लेनी होंगी, जहां ऑटोमेटेड ट्रैक के माध्यम से पारदर्शी और तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है.
ऑटोमेटेड ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट पूरी तरह तकनीक आधारित होता है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश न्यूनतम होती है. इससे न केवल योग्य आवेदकों को ही लाइसेंस मिल सकेगा, बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है. विभाग के इस कदम से दलालों और कुछ कार्मिकों की संदिग्ध भूमिका पर भी लगाम लगेगी. लंबे समय से यह शिकायत रही है कि मैन्युअल प्रक्रिया वाले कार्यालयों में नियमों को दरकिनार कर लाइसेंस जारी किए जा रहे थे.