जयपुरः राजस्थान कृषि आधारित अर्थिक संरचना का राज्य है. सूबे के अधिकांश लोगो की आजीविका का मुख्य साधन खेती और पशुधन हैं.लागत और सिंचाई के पानी की कमी के कारण ज्यादातर किसान प्राकृतिक खेती नहीं कर पाते. अब बीजेपी किसान मोर्चा कार्यशाला आयोजित कर किसानों को प्रोत्साहित करेगा.12 जून को जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में प्राकृतिक खेती पर राज्यस्तरीय किसान कार्यशाला आयोजित की जाएगी,जिसमें प्रदेशभर से हजारों किसानों को जोड़ने की तैयारी है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर और किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष कैलाश चौधरी शामिल होंगे.कैलाश चौधरी ने प्रेस वार्ता कर कार्यक्रम की जानकारी दी.
प्रदेश की सियासत में 1952 के चुनावों से ही किसान राजनीतिक ताकत रहा हैं. देश के प्रखर किसान नेता राजस्थान की धरती से निकले. यहीं कारण है कि कोई भी सियासी दल राजस्थान की सियायत में बगैर किसान को साधे कोई रणनीति नहीं बनाता. पीएम नरेंद्र मोदी के विजन को अपनाते हुए बीजेपी किसान मोर्चा ने प्राकृतिक खेती की अलख जगाई है. 12 जून को जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में प्राकृतिक खेती पर राज्यस्तरीय किसान कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर से हजारों किसानों शामिल होंगे. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर और किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष कैलाश चौधरी शामिल होंगे. प्राकृतिक और जैविक खेती के एक्सपर्ट के तौर पर गुजरात राज्यपाल आचार्य देवव्रत का संबोधन होगा
-- प्राकृतिक / जैविक खेती का मकसद ---
खेती की लागत कम करना
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना
रसायन मुक्त खाद्यान्न उत्पादन
जल संरक्षण को बढ़ावा देना
किसानों की आय में वृद्धि करना
पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना
-- भाजपा की रणनीति --
प्रशिक्षण शिविर और सहित विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर किसान कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं.
गौ-आधारित खेती पर जोर: देसी गाय आधारित खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है.
डेमो प्लॉट और मॉडल फार्म: किसानों को सफल उदाहरण दिखाकर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
किसान मोर्चा की सक्रिय भूमिका: भाजपा किसान मोर्चा गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद कर रहा है.
विकसित भारत और आत्मनिर्भर कृषि से जोड़ना: प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और टिकाऊ कृषि के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है.
प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम या समाप्त कर स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से गाय आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा दिया जाता है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक खेती को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में प्रचारित कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ने की पहल की है.