जयपुरः कार्यपालना का बोझ कम करने और डी-रेग्यूलेशन के क्षेत्र में राजस्थान दिसंबर में देश भर में सबसे आगे रहा है. इसके चलते जहां प्रशासनिक कामकाज और राजकाज में पारदर्शिता आई है तो वहीं आम लोगों और उद्योगों से जुड़े काम में खासी आसानी हुई है. इसके चलते अब सीएस वी श्रीनिवास ने डी रेग्यूलेशन के दूसरे चरण को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए हैं.
गुड गवर्नेंस के लिए ई गवर्नेस सिस्टम लागू करना जरूरी है और इसमें बेहतर भूमिका निभाते हुए राजस्थान ने कार्यपालना के बोझ को कम किया है.
क्या किया गया राजस्थान में ?
भजनलाल सरकार में डीरेगुलेशन सुधारों में राजस्थान देश में अव्वल
दिसंबर माह में डीरेगुलेशन से जुड़े सभी 23 प्राथमिकता वाले सुधारों को सफलतापूर्वक लागू किया
उपलब्धि का श्रेय सीएमके साथ-साथ सीएस वी. श्रीनिवास के नेतृत्व वाली ब्यूरोक्रेसी को राज्य की ब्यूरोक्रेसी को भी दिया जा रहा है,
जिन्होंने समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया
राजस्थान इसे लागू करने में देश का पहला राज्य बन गया है
इन सुधारों के जरिए व्यापार, उद्योग और आमजन को अनावश्यक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा.
अब क्या होगा दूसरे चरण में ?
दूसरे चरण में स्कूल शिक्षा,उच्च शिक्षा और बीआईपी के 3-3, रीको,यूडीएच,चिकित्सा,RSPCB और एलएसजी के 2-2,खाद्य-नागरिक आपूर्ति,ऊर्जा,एआरडी,विधि,पर्यावरण (वन),पर्यटन और श्रम के 1-1 प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं.
भू उपयोग परिवर्तन के जरिये भूमिधारकों का शोषण रोकना
इसे लेकर राजस्व विभाग के वर्षों पुराने कानूनों का एक करके भू उपयोग परिवर्तन के लिए कोई मंजूरी की जरूरत न हो, इसे लेकर राज्यों को कदम उठाना है.
कृषि भूमि के गैर कृषि भूमि में रूपांतरण की जरूरत समाप्त करने को लेकर राज्य सरकारों को कदम उठाना है.
बिना CLU के प्लान और अन प्लान क्षेत्रों में भू उपयोग में परिवर्तन को मंजूरी देना है.
इसके लिए राजस्व विभाग नोडल है और यूडीएच इसका सहयोगी विभाग है.
इसके लिए सीएस ने 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय करते हुए संबंधित विभागों को इस बारे में आंध्रप्रदेश के अपनाए गए सिस्टम का अध्ययन करने और विधिक पहलू से परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं.
जब तक प्रतिबंधित न हो तब तक मंजूरी देने के लिए भू उपयोग फ्रेमवर्क को फिर परिभाषित करने और मास्टर प्लान बनाने तक निर्माण को मंजूरी देने संबंधी कार्य
इसके लिए यूडीएच नोडल और सहायक विभाग एलएसजी है जिसकी डेडलाइन 31 मार्च 2026 की है और मास्टर प्लान में इससे जुड़े बदलाव के लिए एक्शन के निर्देश दिए हैं.
मास्टर प्लान के बनने तक डीपीसीआर को अंतरिम प्लान के रूप में माना जाएगा.
मौजूदा और आगामी औद्योगिक क्लस्टर्स में भू उपयोग का बेहतर प्रावधान करना
31 मार्च 2026 की डेडलाइन देते हुए सीएस ने जरूरी आदेस जारी करने, रीको और उसके बाहर के क्षेत्रों में सीईटीपी के लिए नीति के साथ निजी पार्क के लिए नीति बनाने, फायर सेफ्टी सिस्टम में अंतराल को कम करने और एक्शन प्लान देने के निर्देश दिए गए हैं. इसकी कार्यपालना रीको करेगा और एलएसजी और यूडीएच सहायक विभाग हैं.
निर्माण मंजूरी प्रक्रिया को नियमित करना
निवेशकों को सिंगल पॉइंट कॉन्टेक्ट के लिए नोडल एजेंसी बनाने या नियुक्त करने के निर्देश.
लाइसेंसों, मंजूरियों,अनापत्ति प्रमाण पत्रों और कार्यपालना की उनकी कुल संख्या के आधार पर समीक्षा करने के निर्देश.
इसे लेकर उद्योग एसीएस की अध्यक्षता में वर्किंग ग्रुप बने गा जो कि इस बारे में अलग-अलग राज्यों के मॉडल का अध्ययन करके रिपोर्ट देगा.
इसकी भी डेडलाइन 31 मार्च 2026 है.
इसके साथ भवनों के लिए अग्निरोधक नियमों को लेकर दुनिया भर के अच्छे कामों को स्वीकार करने,व्यवसायों के लिए दो लाइसेंस की व्यवस्था हटाने,दुकानों, वाणिज्यिक संस्थानों से जुड़े नियमों को लचीला बनाने,मेट्रोलॉजी एक्ट के लिए वजर और माप के लाइसेंस को आसान बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं.
साथ ही औद्योगिक क्लस्टर्स में स्टेट औद्योगिक विकास अथॉरिटी को नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए लिए सशक्त करने,स्व घोषणा,पूर्व स्थापित मंजूरियों और निरीक्षण को लेकर संरक्षण देने के जरिये एमएसएमई को सुविधाएं देने, व्यवसायों और निवासियों को इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया को कम करने या समाप्त करने, वन भूमि संबंधी प्रक्रिया आसान बनाने,परिवेश पोर्टल का उपयोग करने,पर्यटकों के गुणवत्तापूर्ण ठहराव को प्रोत्साहित करने,निजी स्कूल्स के लिए निम्नतम भू स्वामित्व जरूरतों को खत्म करने सहित कुल 28 तरह के काम बताए गए हैं.