जयपुरः RIMS की फैकल्टी घर पर मरीज नहीं देखेंगी. एम्स की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में NPA लागू रहेगा. रिम्स पर फर्स्ट इंडिया से चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि हमारे देश में जितने भी एम्स है, सभी जगह NPA लागू है. PGI में भी कार्यरत फैकल्टी पर भी घर पर निजी प्रेक्टिस प्रतिबन्धित है. चिकित्सा शिक्षा सचिव ने नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क की रैंकिंग का जिक्र किया.
NIRF रैंकिंग में जो टॉप संस्थान है, वे सभी NPA वाले है. जब वहां पर फैकल्टी मिल रही है तो फिर रिम्स में भी पर्याप्त फैकल्टी मिल जाएगी. रिसर्च इंस्टीट्यूट की ये आवश्यकता है, इसलिए ही NPA अनिवार्य किया गया है. रिम्स दूसरे कॉलेजों से भिन्न इसलिए है, क्योंकि ये यूनिवर्सिटी कम कॉलेज है. राजस्थान के बाकी कॉलेज या तो RUHS या फिर मारवाड़ यूनिवसिटी से सम्बद्ध है. लेकिन रिम्स यूनिवर्सिटी कम कॉलेज होने के नाते अपनी डिग्री देने में समक्ष होगा.
सुपर स्पेशिलिटी सेवाओं के हिसाब से किया जाएगा विकसित:
रिम्स को स्पेशिलिटी और सुपर स्पेशिलिटी सेवाओं के हिसाब से विकसित किया जाएगा. ऐसे में जो MBBS स्टूडेंट अभी RUHS में पढ़ रहे है, वो अपनी डिग्री पूरी करके निकलेंगे. लेकिन अगले साल से RUHS में यूजी यानी MBBS में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. फिलहाल, RUHS में MBBS की 150 सीट्स पर प्रवेश दिया जाता है.
400 से 500 फैकल्टी की जरूरत:
RUHSमें 45 फैकल्टी है, जबकि रिम्स में 400 से 500 फैकल्टी की जरूरत रहेगी. हालांकि, उन्होंने स्वीकारा कि RUHS को खड़ा करने में पुरानी फैकल्टी का अहम योगदान है. साथ ही कहा कि ये फैकल्टी चाहेगी तो रिम्स में प्रतिनियुक्ति पर काम कर सकती है. यदि वो रिम्स का हिस्सा बनना चाहते है तो निर्धारित चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकते है. इसके अलावा सरकारी मेडिकल कॉलेज में जाने का भी उनके लिए विकल्प रखा गया है.