जयपुर: RUHS ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर के रूप में विकसित होगा. इंडियन ऑर्गन डोनेशन डे पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया. RUHS मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि अंगदान मानवता के लिए समर्पण करने से जुड़ा महादान है. राज्यपाल ने कार्यक्रम में उन सभी महान आत्माओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, 'जिन्होंने अपना अंगदान कर संकट में जीवन जी रहे मरीजों को नया जीवन दिया'.
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी को अंगदान की शपथ भी दिलाई. राज्यपाल ने कहा कि देश में हर वर्ष लाखों लोग अंग नहीं मिलने के चलते जान गंवाते हैं'. किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़ों की मांग आज भी सर्वाधिक,जिनकी उपलब्धता कम है. इस दृष्टि से अंगदान को प्रदेश के हर परिवार तक पहुंचाया जाना जरूरी है. ताकि हम किसी अन्य व्यक्ति की जिंदगी में नई उम्मीदों का सवेरा ला सकते हैं.
राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष कई जरूरतमंद लोग जान गंवाते हैं. यदि इन लोगों को जरूरत के हिसाब से अंग मिल जाए तो जान बच सकती है. राज्यपाल ने कहा कि हमारे यहां अंग प्रत्यारोपण करने की सुविधाएं अच्छी है. लेकिन यहां पर अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी बहुत ही कम है. उन्होंने अंगदान की प्रेरणा के साथ-साथ अंगदान से जुड़ी सेवाओं का भी प्रदेश में विस्तार करने और सभी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण संबंधी उपकरणों की व्यवस्था प्रभावी रूप में किए जाने पर जोर दिया.
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शिरकत की. इस दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि हमारे देश में किडनी का सफल प्रत्यारोपण करीब 25 साल पहले शुरू हुआ. 1 दिसम्बर 1971 को तमिलनाडु में पहला प्रत्यारोपण हुआ था. लेकिन इतना समय गुजरने के बावजूद अंगदान के प्रति जागरूकता नहीं होना चिंतनीय है.
इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि अंगदान दिवस मनाने की बजाय इसे एक आंदोलन मानकर क्रियान्वित किया जाए. राज्यपाल ने अंगदान के साथ स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी अभियान चलाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हम घर में एक दिन पहले बनी रोटी नहीं खाते, परंतु बाजार से पुरानी बनी ब्रेड खरीदकर खा लेते हैं. उन्होंने खान पान की आदतों में सुधार किए जाने और व्यसन मुक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि RUHS कुलगुरु प्रो.प्रमोद येवले, प्राचार्य डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने अंगदान पर प्रकाश डाला. इस दौरान डॉ ग्रोवर ने कहा कि RUHS जल्द ही ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर के रूप में विकसित होगा. इस सेंटर के शुरू होने से ब्रेन-डेड मरीजों से अंगों के सुरक्षित संरक्षण, समन्वय और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा.