परिवहन विभाग की 2 साल की उपलब्धियां, सुरक्षा और पारदर्शिता... ट्रांसपोर्ट सेक्टर मजबूत, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राज्य सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और प्रशासनिक दक्षता के क्षेत्र में हासिल की गई उल्लेखनीय उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा जारी किया गया है. बीते दो वर्षों में विभाग ने डिजिटलाइजेशन, ई-गवर्नेंस और स्मार्ट ट्रैफिक मॉनिटरिंग के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व कदम उठाए हैं, जिनका सीधा लाभ राज्य के लाखों वाहन चालकों और आमजन को मिला है.

परिवहन विभाग ने पिछले दो वर्षों में तकनीक, पारदर्शिता, सुरक्षा और सेवा वितरण के क्षेत्र में जो सुधार किए हैं, उससे राज्य  ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काफ़ी बदलाव आया है , डिजिटल प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा के कठोर उपाय, राजस्व वृद्धि और रोडवेज का विस्तार—इन सभी ने मिलकर एक मजबूत, आधुनिक और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की नींव रखी है. डिप्टी सीएम डॉ प्रेमचंद बैरवा के नेतृत्व में राजस्थान अब देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है जहां स्मार्ट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट केवल योजना नहीं, बल्कि धरातल पर सफलतापूर्वक लागू प्रणाली बन चुका है. वित्तीय वर्ष की बजट घोषणा के अनुसार ई-डिटेक्शन मॉड्यूल को राजस्थान में लागू किया गया है. इस प्रणाली के माध्यम से बिना टैक्स, फिटनेस, बीमा, परमिट, पीयूसी आदि दस्तावेजों के सड़क पर चलने वाले वाहनों पर स्वचालित ई-चालान जारी किए जा रहे हैं.टोल प्लाजा, एएनपीआर कैमरों और विभिन्न तकनीकी प्लेटफॉर्म से डेटा प्रोसेस कर सिस्टम स्वतः ही उल्लंघन पकड़ता है. इससे न केवल अवैध वाहनों पर लगाम लगी है, बल्कि राज्य सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और सड़क सुरक्षा मजबूत हुई है.

फेसलेस सेवाएं: आरटीओ के चक्कर से मुक्ति

परिवहन विभाग ने नागरिक सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कुल 42 फेसलेस सेवाएं शुरू की हैं.

अब लाइसेंस, पंजीयन, टैक्स, परमिट और वाहन संबंधी कई सेवाएं घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती हैं. 

फेसलेस सुविधाओं से हुआ यह फायदा 

दलाल प्रथा पर रोक

समय की बचत

पारदर्शिता

प्रक्रियाओं में तेजी

परिवहन सचिव शुचि त्यागी का विभाग में पूरा फोकस पारदर्शिता लाने और विभाग की छवि सुधारने पर रहा है , जिन कार्यों के लिए पहले आमजन को विभाग के कई चक्कर लगाने होते थे अब वह काम तय समय में और बिना दलालों के दखल के हो रहे हैं 

हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन हुआ स्वचालित

वाहन पोर्टल पर हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की ऑटोमेटेड प्रक्रिया लागू की गई है.

इससे हुआ यह फायदा 

दस्तावेज अपडेट तेजी से होते हैं

मंजूरी में देरी समाप्त

बैंक और नागरिक दोनों के लिए प्रक्रिया आसान

विभागीय दक्षता में वृद्धिहुई है

यह कदम वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत सिद्ध हुआ है.

ई-रवन्ना ऑटोमेशन: ओवरलोडिंग पर डिजिटल ‘नकेल’

ई-रवन्ना मॉड्यूल को आईटीएमएस से जोड़कर ओवरलोडेड वाहनों पर स्वतः चालान की व्यवस्था लागू की गई है.

अब परिवहन वाहनों पर भार सीमा पार करने पर सिस्टम स्वयं चालान जनरेट करता है, जिससे—

ओवरलोडिंग में कमी

सड़क क्षति में घटाव

दुर्घटनाओं में कमी

जैसे परिणाम सामने आए हैं.

वीएलटीएस: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम

व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है.

इसके तहत—
सभी यात्री सेवा वाहनों में AIS-140 अनुपालन वाला जीपीएस डिवाइस अनिवार्य

राज्य-स्तरीय कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर में 24×7 मॉनिटरिंग

महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित

रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग

जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

एनआईसी को इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है और नियंत्रण केंद्र परिवहन विभाग में स्थापित किया जा चुका है.

दो वर्षों में परिवहन विभाग ने बदली व्यवस्था: ‘टेक्नोलॉजी + पारदर्शिता’ मॉडल

राजस्थान सरकार के इन दो वर्षों में परिवहन विभाग ने—

तकनीक आधारित निगरानी

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण

सड़क सुरक्षा में सुधार

स्वचालित चालान

फेसलेस सेवाओं के जरिए सीधा लाभ

जैसे कई सुधार किए हैं, जिनसे राज्य भर में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है और नागरिकों को तेज, सरल और भरोसेमंद सेवाएं मिल रही हैं. 

परिवहन विभाग का दावा है कि आने वाले वर्ष में भी इस डिजिटल मॉडल को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे राजस्थान देश के सबसे आधुनिक और तकनीक-संचालित परिवहन प्रबंधन वाले राज्यों में शामिल हो सकेगा.