जयपुर : प्रदेश के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने आज दोपहर स्वास्थ्य भवन का औचक निरीक्षण किया. करीब साढ़े 12:00 स्वास्थ्य भवन पहुंचे CS ने पहले विभिन्न कार्यालयों का कामकाज देखा. फिर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए CS ने कहा कि "जीवन रक्षा के लक्ष्य को सर्वोपरि रखा जाए". पेशेंट सेंट्रिक एप्रोच के साथ दायित्वों का निर्वहन करें. इस दौरान उन्होंने विभाग के रामाश्रय सहित अन्य नवाचारों को सराहा.
मुख्य सचिव ने सबसे पहले स्वास्थ्य भवन में विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण किया. उन्होंने निर्देश दिए कि भवन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए. अभियान चलाकर अनावश्यक सामग्री को कार्यालयों से हटाया जाए और उचित प्रक्रिया अपनाकर उसका निस्तारण किया जाए. सभी अधिकारी एवं कर्मचारी समय पर कार्यालय में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों को ईमानदारी एवं समर्पण भाव के साथ पूरा करें, ताकि बेहतर सर्विस डिलीवरी का हमारा उद्देश्य पूरा हो. इसके बाद बैठक में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से विगत दिनों में रामाश्रय वार्ड, मिशन लीवर स्माइल, मिशन मधुहारी, निरामय राजस्थान, पिंक पखवाड़ा जैसे नवाचार किए गए हैं. ये नवाचार रोगी केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. विभाग ऐसे नवाचारों का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाएं और पेशेंट सेंट्रिक एप्रोच के साथ आपणो स्वस्थ राजस्थान के संकल्प को साकार रूप दे. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हर अधिकारी एवं कार्मिक का सर्वोच्च लक्ष्य जीवन रक्षा हो.
मुख्य सचिव ने की रामाश्रय वार्ड नवाचार की सराहना
-बात मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की विजिट से जुड़ी
-इस दौरान उन्होंने रामाश्रय वार्ड नवाचार की सराहना की
-उन्होंने कहा कि ऐसे कदम आमजन की पीड़ा को कम करते हैं और
-प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ाते हैं
-केंद्र सरकार ने देशभर में हुए प्रमुख नवाचारों में रामाश्रय का चयन किया है,
-यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है
-उन्होंने रामाश्रय वार्ड योजना का और विस्तार करने के निर्देश दिए
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की हुई 18 साल पुरानी यादें ताजा....!
-बात स्वास्थ्य भवन के निरीक्षण को आए ब्यूरोक्रेसी के प्रशासनिक मुखिया से जुड़ी
-करीब आधे घंटे तक निरीक्षण के दौरान जैसे ही सीएस पहुंचे NHM ब्लॉक
-तो यहां MD(NHM)के कक्ष में पहुंचते ही उन्हें बोर्ड पर दिखा स्वयं का नाम
-यह देख सीएस अपने 2008-2009 के 17 माह के कार्यकाल को याद करके मुस्कुराए
-उन्हें पीएचएस गायत्री राठौड का भी दिखा नाम तो बोले-"आप भी रहे है MD(NHM)"
-इसके बाद कुछ देर सीएम ने अपने कार्यकाल को लेकर अधिकारियों से साझा किए अनुभव
-फिर मीडिया से रूबरू होते हुए भी उन्होंने कहा कि MD(NHM)के रूप में मैंने भी किया है काम
-लेकिन 18 साल के भीतर आया काफी बदलाव,स्वास्थ्य क्षेत्र के कई सूचकांक में अब राजस्थान है अव्वल
-ये हमारे लिए गौरव की बात है, जिसके लिए चिकित्सा विभाग की पूरी टीम बधाई की पात्र है
चिकित्सा संस्थाओं का किया जाए नियमित निरीक्षण
-बात मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की विजिट से जुड़ी
-इस दौरान वी श्रीनिवास ने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें
-चिकित्सा संस्थानों का सतत निरीक्षण किया जाए
-उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग के दिए निर्देश
-ताकि विश्लेषण किया जाए कि कितने लोगों तक उसका लाभ पहुंच रहा है और
-उसमें सुधार की क्या आवश्यकता है
-CS ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और सुदृढ़ करने पर दिया जोर
-उन्होंने कहा कि निचले स्तर तक चिकित्सा संस्थानों में मानव संसाधन का नियोजन पूरी प्लानिंग के साथ किया जाए,
-ताकि हर चिकित्सा संस्थान में क्वालिटी सर्विसेज मिल सके और
-वहां उपलब्ध संसाधनों एवं सेवाओं का पूरा उपयोग हो सके
-अधिकारी ऐसे चिकित्सा संस्थान चिन्हित करें जहां रोगी भार अधिक रहता है,
-वहां प्राथमिकता के आधार पर मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करें
मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना को स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल बताते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं का पूरा लाभ लोगों तक पहुंचे, इसके लिए तकनीक का समुचित उपयोग करें. मॉनिटरिंग के लिए एक डेशबोर्ड बनाएं, जिसमें लाभान्वितों की पूरी जानकारी उपलब्ध हो. पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अधिकाधिक संख्या में डिकॉय आपरेशन किए जाएं. उन्होंने स्वास्थ्य मानकों को और बेहतर करने के लिए सेवाओं को रोगी केंद्रित बनाए जाने पर विशेष बल दिया. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत एवं पेशेंट सेंट्रिक बनाने के लिए निरंतर नवाचारों को प्रोत्साहन दे रहा है. उन्होंने बताया कि विगत समय में मिशन मोड में भर्तियों का कार्य किया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर मानव संसाधन की उपलब्धता बेहतर हुई है.
जल्द ही विशेषज्ञ चिकित्सकों को आवश्यकतानुसार नियोजित कर और अधिक संख्या में एफआरयू, ट्रोमा सेंटर, सीएचसी आदि को क्रियाशील बनाया जाएगा, ताकि लोगों को उपचार के लिए बड़े शहरों में नहीं जाना पड़े. उन्होंने आश्वस्त किया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जीवन रक्षा के लक्ष्य की दिशा में पूरी तत्परता एवं समर्पण के साथ कार्य करेगा. इस दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव, राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं की प्रगति से अवगत कराया.