पीयूष गोयल बोले- भारत की आबादी बोझ नहीं, बल्कि उसकी ताकत है

नई दिल्ली:  केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत की 130 करोड़ की आबादी बोझ नहीं है, बल्कि ताकत है और इस वजह से देश एक बड़ा बाजार बन गया है. गोयल ने यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली इकाई के कोषाध्यक्ष विष्णु मित्तल द्वारा लिखित किताब ‘‘ऐसे थे भारत के गांव’’ के विमोचन के अवसर पर रविवार देर शाम की. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि गांवों में प्रौद्योगिकी और मोबाइल फोन का प्रसार बढ़ा है तथा ग्रामीणों को भी सूचनाएं मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी भी बनाया है. गोयल ने कहा कि मोदी सरकार ने जनधन खातों, आधार और मोबाइल से गांव में रहने वाले गरीबों का सशक्तीकरण किया है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, जनधन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण समेत अन्य योजनाओं को ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखकर बनाया है. उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गांवों में बदलाव देखने को मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पहुंचा है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि देश की आबादी के पास मौजूद हुनर भारत को दुनिया भर में प्रसिद्ध करा रहा है और यह पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित भी कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे देश की 130 करोड़ की आबादी हमारे लिए बोझ नहीं है. यह हमारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. जब मैं वाणिज्य मंत्री के तौर पर कोई मुक्त व्यापार समझौता करता हूं या विदेश में निवेश के लिए बात करता हूं तो वे (यहां निवेश करके) भारत के ऊपर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं. वे देखते हैं कि 130 करोड़ भारतवासी कैसे एक बड़ा बाजार बन गए हैं.” 

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने इस अवसर पर कहा कि 1857 के बाद अंग्रजों ने हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए भारत के गांवों को तबाह कर दिया. पुस्तक के लेखक मित्तल ने कहा कि उन्होंने किताब उन लोगों को अपने गांवों के लिए काम करने के लिए लिखी है, जो पहले गांवों में रहते थे और अब शहरों में रहने लगे हैं और अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं तथा अच्छे पदों पर भी हैं. कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, सांसद रमेश विधूड़ी, विधायक बिजेंद्र गुप्ता सहित कई अतिथि मौजूद थे. सोर्स- भाषा