Navratri Special: बाड़मेर की पहाड़ी पर स्थित माताजी मंदिर में हुई घटस्थापना, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

बाड़मेर: नवरात्रि पर्व पर मां के दरबारों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है और मां जगदम्बा भी विपदा के समय अपने भक्तों पर मेहरबान होती है. एक ऐसा ही मां का मंदिर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सटे बाड़मेर (Barmer) जिला मुख्यालय पर है. जहां पर माताजी ने भारत-पाकिस्तान के सन् 1971 में हुए युद्ध के दौरान बमबारी होने के बावजूद अपने भक्तों का बाल भी बांका नहीं होने दिया.

सरहदी बाड़मेर जिले में 16वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा रावत भीमाजी ने पहाड़ी पर माताजी के मंदिर की स्थापना की थी. तब से मां के प्रति भक्तों की श्रद्धा रही है. भारी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन कर पूजा करते रहे. लेकिन सन् 1971 में भारत पाकिस्तान के युद्ध के दौरान बाड़मेर रेलवे स्टेशन और उत्तरलाई एयरबेस पर पाकिस्तान की ओर से बमबारी की गई. तब बाड़मेर नगरी में निवास करने वाली हजारों की तादाद में जनता मां की चरणों में चलीगई और मन्दिर की सीढ़ियों पर रातें गुजारी. बमबारी के दौरान छर्रे सीढ़ियों तक भी आए लेकिन किसी भी व्यक्ति के खरोच तक नहीं आई. यह मां की चमत्कारी महिमा थी. 

ऐसा बताया जाता है कि 472 वर्ष पूर्व वर्तमान के बाड़मेर शहर से 25 किलोमीटर दूर जूना गांव में बाड़मेर नगरी हुआ करती थी और 100वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा रावत भीम जी ने बाड़मेर शहर की स्थापना यहां पर की. उससे पहले उन्होंने पहाड़ी पर माता जी के मंदिर की स्थापना की और तब से ही भक्तों की मां के प्रति श्रद्धा बढ़ गई. 1971 में युद्ध की बमबारी के बाद मां के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ गई. आम दिनों में भी श्रद्धालुओं की मां के दर्शन करने के लिए भीड़ लगी रहती है. विशेषकर साल की दोनों नवरात्रों के दौरान यहां पर माता जी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु प्रातः 4:00 बजे से ही कतारों में लग जाते हैं और मां का दर्शन लाभ लेते हैं.

नवरात्रि पर्व के दौरान यहां पर प्रतिदिन करीब 10 से 15000 श्रद्धालु माता जी के दर्शन करने के लिए आते हैं. बाड़मेर जिले से ही नहीं अपितु आसपास के जिलों और बाहरी राज्यों के भी श्रद्धालु मां के मंदिर में धोक लगाने के लिए आते हैं. घर में किसी भी शुभ कार्यक्रम के दौरान मां के दर्शन जरूर करते हैं. इस मंदिर के पुजारियों का कहना है कि यहां वर्षों से ही भक्तों का मां के प्रति श्रद्धा भाव रहा है और किसी भी घर में शादी-समारोह हो या बच्चे का जन्म होता है तब सबसे पहले लोग माता जी के मंदिर आकर दर्शन करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं.

शुभ कार्यक्रम के दौरान जात लगाने आते भक्त: 

घर में शुभ कार्यक्रम के दौरान मां के मंदिर आ कर जात करते हैं. गढ़ मंदिर के नाम से प्रख्यात माताजी के मंदिर में नवरात्रि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा भाव देखने को मिलता है. वहीं मंदिर ट्रस्ट मंडल की ओर से भी श्रद्धालुओं के लिए पानी और भोजन प्रसाद की भी व्यवस्था की जाती है. पहाड़ी पर इस मंदिर जाने के लिए करीब 500 सीढ़ियां पार करनी होती है. नवरात्रि पर्व के दौरान इस मंदिर की खास सजावट भी की जाती है.