जयपुर VIDEO: वी.एस. लिग्नाइट लिमिटेड पर खान विभाग मेहरबान, सरकार को करीब 80 करोड़ रुपये की रॉयल्टी का नुकसान, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: वी.एस. लिग्नाइट लिमिटेड पर खान विभाग मेहरबान, सरकार को करीब 80 करोड़ रुपये की रॉयल्टी का नुकसान, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: बीकानेर क्षेत्र के गुड़ा में बिजली बनाने के लिए लिग्नाइट से पहले ओवरबर्डन के रूप में निकले 83 लाख टन बॉल क्ले पर कोई फैसला नहीं लिया गया, जबकि खनन कर रही कंपनी वीएस लिग्नाइट ने स्टॉक किए 5000 टन नए ओवरबर्डन को बेचने की अनुमति मांग ली है. पूरे मामले में खाने के बाद की अनदेखी कहें या मिलीभगत इससे सरकार को करोड़ों रुपए नुकसान का अंदेशा है. 

खान विभाग ने गुड़ा में लिग्नाइट बेस पॉवर प्लांट के लिए वीएस लिग्नाइट लि. को लीज जारी की थी. लिग्नाइट से पहले ओवरबर्डन के रूप में निकले बॉल क्ले, पीली मिट्टी व अन्य मिनरल को अलग किए बिना ही डंप किया जाता रहा जिससे 83 लाख टन क्ले का पहाड़ खड़ा हो गया और सरकार को करीब 80 करोड़ रुपए रायल्टी का नुकसान हुआ. वर्ष, 13 में खान विभाग की कमेटी ने मौका निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 64 लाख टन क्ले का 20 प्रतिशत खराब हो चुका, यानी कि करीब 10 करोड़ रुपए रायल्टी का नुकसान हुआ. अब तक डंप किए गए क्ले पर किसी भी तरह का निर्णय लिए बिना ही खान विभाग ने 30 मार्च को आदेश जारी कर कंपनी को केवल रायल्टी देकर ओवरबर्डन बेचने की स्वीकृति दे दी. कंपनी ने 5000 टन नए क्ले और बजरी का स्टॉक बताकर उसे बेचने की परमिशन भी मांग ली है. खान निदेशालय ने बीकानेर खनिज अभियंता से कहा है कि नए स्टॉक का वेरिफिकेशन कर कंपनी को दी गई ओवरबर्डन बेचने की अनुमति पर कार्रवाई करें. गुड़ा में क्ले निस्तारण के लिए एक कमेटी बनाई गई. बार-बार निविदा करने के बाद भी बोली नहीं लगने पर कमेटी ने मौका निरीक्षण किया और रिपोर्ट तैयार की. कमेटी ने निदेशालय को प्रस्ताव दिया कि डंप किए ओवरबर्डन क्ले की क्वालिटी अच्छी नहीं है. इसे 50 रुपए प्रति टन पर बेचा जाना चाहिए. इस प्रस्ताव पर निदेशालय स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया. दरअसल 83 लाख टन क्ले के मामले में खान विभाग के अधिकारियों पर फर्म वीएस लिग्नाइट के साथ मिलीभगत करने के आरोप लग रहे हैं. 

पूरे प्रकरण में खान विभाग को करीब 80 करोड़ रुपए रॉयल्टी और डीएमएफटी का नुकसान हुआ. यही नहीं खान विभाग की लापरवाही से वीएस लिग्नाइट का 8 वर्ष से असेसमेंट ही नहीं करवाया गया. इसी के कारण वी.एस. लिगनाईट पर विभाग का रॉयल्टी डीएमएफटी, एनएमईटी व टीसीएस मिलाकर मय जुर्माना 8 करोड़ 20 लाख 18 हजार 68 रुपये वर्ष 2020 तक बकाया हो गया था मगर इस फर्म के दिवालिया घोषित हो जाने के कारण महज मात्र 7 लाख 65 हजार उनतालीस रुपये की वसूली ही की जा सकी. इस मामले में बीकानेर के अधीक्षण खनिज अभियंता भीम सिंह का कहना है कि गुड़ा में कंपनी की ओर से 5000 टन नए ओवरबर्डन क्ले-बजरी को बेचने पर निदेशालय स्तर पर निर्णय होना है. पूर्व में डंप 83 लाख टन क्ले को 50 रुपए प्रति टन से बेचने के प्रस्ताव भेजे गए थे. दूसरी ओर करन मामलों के जानकार देवेंद्र सिंह का कहना है कि वीएस लिग्नाइट पॉवर लि. को फायदा पहुंचाने के लिए बिना मूल्य केवल रायल्टी और डीएमएफटी लेकर क्ले बेचने की मंजूरी दी गई है. अगर मंशा सही होती तो पूरे 83 लाख टन की रायल्टी और डीएमएफटी वसूलने की शर्त डाली जाती. पूरे मामले में बड़े घोटाले की जांच होनी चाहिए.

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