जयपुरः राजस्थान का प्रशासनिक सुधार का सिस्टम देशभर के लिए मॉडल बन गया है. देशभर में 9 मापदंडों के आधार पर राजस्थान ऊंची पायदान पर है बल्कि स्टेट ग्रीवियंस पोर्टल पर उसकी शिकायत निपटारे का औसत राष्ट्रीय औसत से अच्छा है. इसके चलते मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास के नेतृत्व में इस मॉडल को देश के अन्य राज्यों में लागू करके गुड गवर्नेस की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाने की तैयारी है.
हर राज्य का शिकायत मैकेनिज्म का सिस्टम उसके सुशासन का स्तर बताता है. इसे लेकर 9 मापदंडों के आधार पर रोजाना की प्रगति रिपोर्ट बनाई जाती है जिसमें राजस्थान के आंकड़े न सिर्फ सुखद है बल्कि अन्य राज्यों के लिए नजीर हैं.
24 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार
रोजाना की प्रगति रिपोर्ट : राजस्थान का अंकगणित
CPGRAMS के केन्द्र के पोर्टल पर शिकायतों का निवारण-13104
स्टेट ग्रीवियंस पोर्टल पर शिकायतों का निस्तारण 15 लाख 11 हजार 705
सर्विस डिलीवरी के तहत आवेदन निस्तारित-1 करोड 51 लाख 87 हजार 858
जिले में वर्कशॉप/ शिविर आयोजित- 30702
बेस्ट गुड गवर्नेंस प्रैक्टिस-439
आम जन शिकायत निवारण की सक्सेस स्टोरीज यानि सफलता की कहानी- 267
विजन डॉक्यूमेंट डिस्ट्रिक्ट @ 100- 98
पीआईबी स्टेटमेंट- 522
सोशल मीडिया -2809
राज्यों के शिकायत निस्तारण की बानगी : आंकड़ों की जुबानी
राजस्थान का 24 दिसंबर तक का शिकायत निस्तारण का आंकड़ा 5 लाख 53 हजार 375 तक पहुंच गया है.
उत्तराखंड में 5 लाख 45 हजार 21 शिकायतों का निस्तारण हुआ है और वह दूसरे स्थान पर है तो मध्यप्रदेश का आंकड़ा 1 लाख 69 हजार 791 है.
राजस्थान के जिलों के आंकड़े
रैंकिंग में हालांकि कई मापदंडों का आधार होने से जयपुर टॉप पर है लेकिन जालोर में सबसे ज्यादा 51511 शिकायतें निस्तारित हुईं हैं. जयपुर में यह आंकड़ा 41940 है.
कोटा में शिकायत निस्तारण का आंकड़ा 26458 है. भीलवाड़ा में 23262,टोंक में 23158 शिकायतें निस्तारित हुईं हैं तो सवाई माधोपुर में 22566,भरतपुर में 22194 शिकायतों का निपटारा हुआ है.
बालोतरा में सबसे कम 1338 शिकायत निस्तारण हुआ है. इसके अलावा डीग में 1893 शिकायतें निस्तारित हुईं तो सलूम्बर में 2213 शिकायतों का निपटारा हुआ है. ये तीनों ही जिले शिकायत निपटारे के मामले में निचली पायदान पर हैं.
खास बात यह है कि 25 जिलों का शिकायत निस्तारण 10 हजार से ज्यादा है.
केन्द्र का जन शिकायतों का निस्तारण का पोर्टल CPGRAMS है जिसमें भी राजस्थान की पेंडेंसी उसके जैसे ही अन्य राज्यों के मुकाबले खासी सही है. इसमें राजस्थान की पेंडेसी जहां 2376 है तो महाराष्ट्र की 29535,यूपी की 19956 और बिहार की 11884 शिकायतें पेंडिंग हैं. शिकायत निस्तारण में सबसे कम पेंडेंसी लक्षद्वीप केन्द्र शासित प्रदेश है जहां 25,सिक्किम में 28 और लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेश की 34 शिकायतों की पेंडेंसी हैं,लेकिन ये खासे छोटे राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश हैं.