जयपुरः चुनाव आयोग के समक्ष दावे प्रतिदावो के बीच राजस्थान में SIR को लेकर सियासत जारी है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की प्रतिक्रिया के विरोध में सहकारीता मंत्री गौतम कुमार दक ने पलटवार किया. गौतम कुमार दक ने कहा कि कांग्रेस को विवाद खड़ा करने के लिए कोई न कोई मुद्दा चाहिए एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है आयोग की ओर से सूची जारी हो चुकी है जिसमें दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का प्रावधान है चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और दावों-आपत्तियों की तिथियां बढ़ाने या न बढ़ाने का निर्णय आयोग अपने विवेक से करता है किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं अभी नाम काटने की कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है केवल आपत्तियां दर्ज की गई हैं जांच के बाद सही या गलत पाए जाने पर ही निर्णय लिया जाएगा. यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो वह अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर नाम पुनः जुड़वा सकता है कांग्रेस को अंतिम सूची जारी होने के बाद यदि कोई आपत्ति होती तो बात समझ में आती लेकिन अभी तो केवल प्रारंभिक प्रक्रिया चल रही है कांग्रेस बेवजह आरोप-प्रत्यारोप कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है
गौतम कुमार दक ने बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में सुनवाई की. कार्यकर्ता सुनवाई में विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 70 परिवेदनाएं प्राप्त हुईं. इनमें सहकारिता, राजस्व, बिजली, जलदाय, सामाजिक न्याय सहित कई विभागों से संबंधित शिकायतें शामिल थीं. मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान कुछ मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंत्री गौतम दक ने कहा कि कांग्रेस अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में जनसंपर्क नहीं कर पाई. उनकी सरकार होटलों में बंद रही, जबकि भाजपा सरकार पिछले दो वर्षों से लगातार जनता के बीच जाकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि वे दो साल तक घर से बाहर नहीं निकले थे. मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि प्रदेश का ऐसा कोई जिला नहीं होगा, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दौरा नहीं किया हो. मुख्यमंत्री ने जिलों में प्रवास कर जनता की समस्याओं को सुना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए. जनता ने भाजपा सरकार के दो वर्षों के बजट को देखा है और अब तीसरे बजट की तैयारियां चल रही हैं. हर वर्ग और हर समुदाय से संवाद कर बजट को लेकर सुझाव लिए जा रहे हैं. वहीं कांग्रेस सरकार की कई घोषणाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं.