जयपुर: संवेदनशील क्षेत्रों में जबरन संपत्ति खरीद-फरोख्त को रोकना, सामाजिक संतुलन बनाए रखना और किरायेदारों को बेदखली से सुरक्षा प्रदान करने को लेकर भजनलाल सरकार का डिस्टर्ब एरिया एक्ट विधानसभा में पारित हो गया.संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक, 2026” पर अपनी बात कही.पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा हमारी सरकार आते ही बिल खत्म करेंगे.
राजस्थान विधानसभा में आज का दिन अहम रहा.भजनलाल सरकार की ओर से लाए गए विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक, 2026 यूं कहे डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल बहुमत के साथ पारित हो गया. विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में संपत्ति की जबरन बिक्री को रोकना और किरायेदारों को बेदखली से सुरक्षा प्रदान करना है, कांग्रेस विधायक और पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा किगुजरात से आई पर्ची के आधार पर लाया गया डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2028 में कांग्रेस सरकार आई तो खत्म करेंगे.
भजनलाल सरकार दकी ओर से विधानसभा में लाया गया डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026 उन क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित कानून है जिन्हें सरकार “विक्षुब्ध क्षेत्र” घोषित करेगी. इस विधेयक के लागू होने के बाद ऐसे क्षेत्रों में जमीन या मकान की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण पर विशेष नियंत्रण रखा जाएगा. विधेयक के अनुसार राज्य सरकार किसी भी ऐसे इलाके को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित कर सकती है जहां सांप्रदायिक तनाव, दंगे या कानून-व्यवस्था की स्थिति अस्थिर होने की आशंका हो. ऐसे क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति-जैसे जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति-का हस्तांतरण बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा. यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के संपत्ति का सौदा करता है तो ऐसा लेन-देन अवैध और शून्य माना जाएगा. संसदीय कार्य विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने बिल को सदन के पटल पर रखा.
राजस्थान विधानसभा में राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया बिल-2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक उन्माद फैलाकर ऐसे कानून ला रही है और बहुसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए गुजरात मॉडल लागू करने की कोशिश कर रही है. डोटासरा ने कहा कि इस बिल के जरिए सरकार की नजर जमीन-जायदाद पर है और संपत्ति के खरीद-फरोख्त जैसे संवैधानिक अधिकारों पर नियंत्रण करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा. उन्होंने कहा कि शांत क्षेत्रों को अशांत बनाने की साजिश के तहत यह बिल लाया गया है. डोटासरा ने आरोप लगाया कि गुजरात से पर्ची दिल्ली होते हुए यह बिल राजस्थान लाया गया है और सरकार प्रदेश में अनावश्यक तनाव पैदा करना चाहती है.
संसदीय कार्यमंत्री विधि जोगाराम पटेल ने विधयेक को लेकर कहा कि विधेयक का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में जबरन संपत्ति खरीद-फरोख्त को रोकना, सामाजिक संतुलन बनाए रखना और किरायेदारों को बेदखली से सुरक्षा प्रदान करना है. दंगों या तनाव की स्थिति में कई बार लोग डर या दबाव में अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिसे रोकने के लिए यह विधेयक लाया गया है. पटेल ने कहा कि सदन में आज राजनीतिक मजबूरियां उबर की आई जो इतिहास में पहली बार है, कट पेस्ट के उद्बोधन सदन में हुए हुए.
इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की भी बात आई, क्या इस विधेयक में जाति पंत समुदाय धर्म का जिक्र हुआ है क्या ? दंगा होने पर ही कानून लाया जाता है. जोगाराम पटेल ने कहा कि इस विधेयक का उल्लेख किसी भी राज्य में उसका नहीं किया गया है. सभी संप्रदाय सभी पूजा पद्धतियां हमारे लिए समान है. यह बहुत संख्या अल्पसंख्यक धर्म जाति संप्रदाय पथ कहीं भी इसमें कोई गुंजाइश नहीं है , ना गुजरात के हालात का, ना गुजरात के कानून का, ना गुजरात की व्यवस्था की, ना गुजरात के मॉडल की बात की गई है.पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने बिल पर अपनी बात रखी.
कांग्रेस भले ही इस बिल का विरोध कर रही है, लेकिन एक समय कांग्रेस ऐसा ही कानून गुजरात में लाई थी . गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 1986 में डिस्टर्ब्ड एरिया ऑर्डिनेंस पेश किया था.इस अध्यादेश में यह जरूरी किया गया था कि अशांत इलाके में हर बिक्री के लिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर गेटकीपर के तौर पर काम करेगा. वो यह पक्का करेगा कि लेन-देन मर्जी से, बिना किसी दबाव के और सही मार्केट वैल्यू पर हो.सिर्फ 1.5 साल के लिए एक अस्थायी उपाय के तौर पर लाए गए इस अध्यादेश का रास्ता 1991 में बदल गया, जब इसे चिमनभाई पटेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में एक कानून के तौर पर लागू किया गया.