VIDEO: मौसमी बीमारियों के सीजन के बीच स्वाइन फ्लू की एग्रेसिव एंट्री, अगस्त माह में सर्वाधिक 35 केस आ चुके सामने, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर : प्रदेश में मानसून भले ही औसतन चल रहा हो, लेकिन मौसमी बीमारियां एक्टिव मोड पर आ गई है. फिर चाहे बुखार, खांसी, जुखाम के सामान्य मरीज हो या फिर डेंगू, स्वाइन फ्लू और स्क्रब जैसी बीमारियां, कमोबेश हर घर में बीमार देखे जा रहे है. इस दौरान सर्वाधिक खतरा स्वाइन फ्लू का सामने आया है, जिसके केस अगस्त माह में एकाएक बढ़े है. हालांकि,चिकित्सा विभाग ने मौसमी बीमारियों की सक्रियता को देखते हुए सर्विलांस जरूरी बढ़ा दी है. आखिर क्या है मौसमी बीमारियों की फील्ड की स्थिति और विभाग की तैयारियां, 

स्वाइन फ्लू के स्प्रेड को लेकर देश की राजधनाी दिल्ली समेत कई राज्य चर्चाओं में चल रहे है. अब इन चर्चाओं में राजस्थान भी जुड़ता नजर आ रहा है, जहां अगस्त माह में एकाएक स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़ने लगे है. यदि सरकारी आंकड़े को देखते तो इस साल में प्रदेश में अब तक 129 पॉजिटिव केस सामने आए है. लेकिन चिंता की बात ये है कि इसमें से अकेले अगस्त माह में 35 केस पॉजिटिव चिन्हित किए गए है. इसके अलावा जयपुर समेत प्रदेशभर में एकाएक खासी, जुखाम के साथ ही लंबे समय तक बुखार की दिक्कतों वाले मरीज भी बढ़ गए है. अकेले एसएमएस अस्पताल की बात की जाए तो मेडिसिन की ओपीडी से लेकर आईपीडी में हालात हाउसफुल जैसे हो गए है. चिंता की बात ये कि मौसमी बीमारियों में कई मरीज ऐसे भी आ रहे है, जिन्हें सामान्य से काफी तीव्र श्रेणी का लम्बे समय तक बुखार है.

राजस्थान में स्वाइन फ्लू का रिपोर्ट कार्ड
-चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड में इस साल दर्ज किए गए 129 केस
-अकेले जयपुर में सर्वाधिक 56 केस रजिस्टर्ड, जबकि उदयपुर में आए 30 केस
-इसके अलावा राजसमंद में 9, चित्तौडगढ़ में 5, सीकर 4, झुंझनूं और करौली में 3-3
-दौसा, डीडवाना, कोटपूतली-बहरोड, प्रतापगढ़, सलुम्बर, श्रीगंगानगर में 2-2 केस
-जबकि अलवर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीग, हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, सिरोही में 1-1 चिन्हित
-चिंता की बात ये कि अगस्त माह में ही एकाएक बढ़ते दिख रहे स्वाइन फ्लू के मरीज
-इस दौरान सामने आए 35 मरीज, जिसके बाद अलर्ट मोड पर आया चिकित्सा विभाग
-खुद सूबे के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने फील्ड अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
-सर्विलांस सैम्पलिंग बढ़ाने के साथ ही अस्पतालों में पुख्ता व्यवस्थाएं रखने के निर्देश

आइए आपको बताते है स्वाइन फ्लू के बढ़ते केस
माह ::::::::::::::::::::स्वाइन फ्लू के केस
जनवरी 2026 --- 2
फरवरी 2026 --- 3
मार्च 2026 ----- 20
अप्रेल 2026 ---- 22
मई 2026 ------- 25
जून 2026 ------ 14
जुलाई 2026 --- 5
अगस्त 2026 --- 35

(स्वाइन फ्लू को लेकर पेरेंटस के लिए अलर्ट)
- जुखाम,खासी की शिकायत हो, खास तौर पर बच्चे की सांस तेज चल रही हो, तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें.
- ऐसे लक्षण दिखने पर स्वाइन फ्लू की जांच कराए, रिपोर्ट आने तक बच्चें को स्कूल न भेजे
- भीडभाड वाले स्थानों पर बच्चे को ले जाने से बचे
- जो बच्चे पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, चिकित्सकों की राय से उन्हें टीका लगाए
- परिजन खुद भी ऐतियातन मास्क लगाकर रखे
- कोशिश यही करें कि बच्चें को एक आइसोलेशन वाली जगह पर रखा जाए

स्वाइन फ्लू के ये लक्षण : तीन से चार दिन तक खांसी, जुखाम, बुखार, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी, दस्त, पेटदर्द, बलगम में रक्त आना, नाखूनों में नीलापन
स्वाइन फ्लू से बचाव : भीडभाड वाले स्थान पर जाने से बचे, यदि किसी भी तरह के लक्षण नजर आए तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श ले.

सरकारी आंकड़ों पर गौर फरमाए तो सालाना डेटा में अधिकांश बीमारियां कंट्रोल में है, लेकिन फील्ड की स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है. एसएमएस समेत जयपुर के अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी व आईपीडी में हाउसफुल जैसे हालात है.

राजस्थान में मौसमी बीमारियों का सरकारी "ग्राफ"
-चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड में इस साल अभी तक कंट्रोल में बीमारियां
-डेंगू के 582 केस चिन्हित, जबकि पिछले साल अगस्त तक आए 1055  केस
-इस साल मलेरिया के 472 मामले आए सामने, जबकि पिछले साल ये आंकड़ा रहा 715
-इसी तरह चिकनगुनिया के 92 केस रजिस्टर्ड, जबकि पिछले साल अगस्त तक थे 213 केस
-हालांकि, विभाग के आंकड़ों के इतर फील्ड की स्थिति देखी जा रही काफी गंभीर
-एसएमएस हो या अन्य अस्पताल, कमोबेश हर जगह ओपीडी से आईपीडी में जबरदस्त भीड़
-इस दौरान अधिकांश निजी अस्पतालों में हाउसफुल जैसी देखी जा रही स्थिति