पुणे : पुणे में राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम मे कहा कि मैं यहां आपसे संवाद करने आया हूं. विचारों और उन पर चर्चा करने आया हूं. हर कोई अपने आप में अनूठा है. आप सब अपने आप में खास हो. मैं यहां आपको सुनने आया हूं. मैं यहां राजनीति की बात करने नहीं आया.
हमने एक दिलचस्प शब्द सोचा- 'कंट्रोल' (नियंत्रण) क्या आपको लगता है कि समाज आपको कंट्रोल करने की कोशिश करता है, पुरुष आपको कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं, आप जो भी करते हैं उसमें? तो, यहाँ एक जाल है, और कंट्रोल करने के चार तरीके हैं.
कंट्रोल का पहला तरीका है- हिंसा, कंट्रोल का दूसरा तरीका है- अनादर, समय का इस्तेमाल आपके खिलाफ किया जाता है, और ज़िंदगी के हर क्षेत्र में, किसी न किसी तरह, पुरुष और सिस्टम आपको कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं. और बहुत दिलचस्प बात यह है कि इस दमन को 'फिक्र' का नाम दिया जाता है. हमें आपकी बहुत फिक्र है. इसीलिए हमें आपको कंट्रोल करने की ज़रूरत है.
उन्होंने आगे कहा कि मनु स्मृति में महिलाओं पर गलत व्याख्या की गई है. महिलाओं की पहचान उनकी खुद की है. 70 करोड़ महिलाएं बेहद अहम. महिलाएं स्वभाव से पुरुषों की तुलना में ज़्यादा संवेदनशील, कोमल, दयालु और भविष्य की सोच रखने वाली होती हैं और इसीलिए मेरा पक्का मानना है कि भारत की महिलाएं ही देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं. बेटी, पत्नी, मां महिलाओं की पहचान नहीं होती. किसी रिश्ते से बढ़कर महिलाओं की पहचान है.