नई दिल्ली : लोकसभा में एंटी पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पेश किया है. हंगामे के बीच केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने बिल पेश किया. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि छात्रों के बेहतर भविष्य के बिल लाए हैं. विपक्ष सदन में चर्चा से भाग रहा है. विपक्ष लगातार नए नए बहाने बना रहा है.
सदन में चर्चा नहीं तो गलत संदेश जाएगा. सभी दलों से चर्चा में शामिल होने की अपील की है. वहीं स्पीकर ने कहा कि सभी दल चर्चा में शामिल हों. विपक्ष बिल पर चर्चा में सहयोग करें. मांग के बाद विपक्ष हंगामा क्यों कर रहा है. चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.
बता दें कि इस बिल में पेपर लीक करने वालों को दस साल तक की जेल और दस करोड़ तक जुर्माना होगा. केंद्र सरकार ऐसे मामलों के लिए स्पेशन टास्क फोर्स बना सकेगी. इस बिल के मुताबिक़ सीबीआई या एसआईटी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी. प्रस्तावित क़ानून के तहत 5 से 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा. अभियुक्तों से परीक्षा का खर्च भी वसूला जाएगा.
उन्हें आठ साल तक कोई सार्वजनिक परीक्षा देने पर रोक लगेगी. पहले एक करोड़ का जुर्माना था बैन चार साल का था.आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी परीक्षा सिस्टम को फूलप्रूफ बनाने पर जोर दे रहे है. इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाईपावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया. इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया.
टास्क फोर्स में तकनीकी के अलावा विज्ञान, खुफिया तंत्र व सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, शिक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक एक्सपर्ट शामिल है. पेपर लीक माफिया के आरोपियों को जेल भेजने, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने, आज संसद में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक-2025 सरकार लाएगी. हाईपावर्ड टास्क फोर्स नीलेकणि के साथ पूर्व इसरो चेयरमैन एस.सोमनाथ, पूर्व IB चीफ तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी.कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल,पूर्व IAS अमृतलाल मीणा को शामिल किया.