VIDEO: शहरी सरकार की जंग, कांग्रेस तैयार, PCC ने विधानसभा चुनाव कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव का रण तैयार हो गया है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनावी समर तैयारियां तेज कर दी हैं. कांग्रेस ने प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर दिए हैं. इन कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी स्थानीय संगठन के साथ तालमेल कर मजबूत प्रत्याशियों की पहचान करने और जमीनी फीडबैक जुटाने की होगी. वहीं राजधानी जयपुर में कांग्रेस ने नगर निगम फतह करने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. 

कांग्रेस इस बार निकाय चुनाव को महज स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के ढाई साल के कामकाज के खिलाफ जनमत के तौर पर पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी ने प्रत्याशी चयन से लेकर बगावत रोकने, स्थानीय समीकरण साधने और चुनाव के बाद पार्षदों की एकजुटता बनाए रखने तक का पूरा संगठनात्मक प्लान तैयार किया है. कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण का फार्मूला भी संगठन के जरिए लागू करने का फैसला किया है. यानि एक व्यक्ति के हवाले टिकट नहीं होगी, बल्कि सामूहिक निर्णयों से उम्मीदवार का फैसला होगा. 

ऑनलाइन मिल रहे आवेदनों को पहले जिला कांग्रेस कमेटियों के पास भेजा जा रहा है. यहां पर उम्मीदवार को चयन होगा. वहीं राजधानी जयपुर में कांग्रेस ने बड़े स्तर पर एक्शन प्लान तैयार किया है. जयपुर के 150 वार्डों के लिए अब तक 1350 से ज्यादा आवेदन पहुंच चुके हैं. जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि कांग्रेस इस बार मिशन 100 के लिए काम कर रही है. चुनाव के लिए चार प्रमुख कमेटियों का गठन कर दिया गया है, जिनमें वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है.

जयपुर शहर कांग्रेस का चुनावी प्लान
-औसतन हर वार्ड में करीब 9 दावेदार टिकट की दौड़ में
-सर्वे रिपोर्ट, संगठनात्मक फीडबैक, स्थानीय समीकरण के आधार पर टिकट तय होंगे
-सिर्फ घोषणा पत्र की जगह जयपुर विजन प्लान बनाने का एलान
-RPSC के पूर्व चेयरमैन बीएम शर्मा की लीडरशिप में बनेगा प्लान
-कैंपेन कमेटी के मुखिया खुद जयपुर अध्यक्ष सुनील शर्मा होंगे
-स्टेयरिंग कमेटी की कमान पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को दी गई है
-पॉलिटिकल अफेयर कमेटी का चेयरमैन विधायक रफीक खान को बनाया गया
-अनुशासन कमेटी के प्रमुख अमीन कागजी होंगे
-ये चार प्रमुख कमेटी मिलकर चुनाव को हैंडल करेगी

कांग्रेस ने निकाय चुनाव में भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी की है. पार्टी सफाई टेंडर में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था के मुद्दे भी जनता के बीच ले जाएगी. वहीं वार्ड स्तर पर सफाई, पेयजल, सड़क, कचरा प्रबंधन जैसे सीधे जनता से जुड़े मुद्दे कांग्रेस के एजेंडे में होंगे. अब देखना होगा कि टिकट चयन से लेकर बगावत रोकने और स्थानीय मुद्दों को चुनावी हथियार बनाने की यह रणनीति कांग्रेस को कितनी सफलता दिलाती है और क्या पार्टी इस बार शहरी निकायों में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन को चुनौती दे पाती है.