VIDEO: निकाय चुनाव में BJP को बड़ा जनादेश का दावा, 309 निकायों में भाजपा को 86 जगह स्पष्ट बहुमत, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान के 309 नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा ने इसे जनादेश की बड़ी जीत बताया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ तक पार्टी नेतृत्व ने परिणामों को सरकार के ढाई साल के कामकाज पर जनता की मुहर के तौर पर पेश किया है. .भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने परिणामों को पार्टी के लिए बड़ा जनादेश बताया है. उन्होंने कहा कि पिछले निकाय चुनाव की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन ढाई से तीन गुना तक बेहतर हुआ है. उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि जहां पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, वहां संगठन समीक्षा करेगा. 

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 309 नगर निकायों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं. इनमें से भाजपा को करीब 86 निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला है. यानी 309 में से करीब एक चौथाई से कुछ अधिक निकाय ऐसे हैं, जहां पार्टी अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में है. वहीं बड़ी संख्या में निकाय ऐसे हैं, जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय या अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. अब भाजपा कमजोर आंकड़ों को निर्दलियों के सहयोग से सुधारने की जुगत में जुटी हुई है. 

नगरीय निकाय में सबसे पहले बात नगर निगमों की करें तो भाजपा के लिए उदयपुर, भीलवाड़ा, जयपुर और कोटा में स्थिति स्पष्ट बहुमत वाली है. उदयपुर में भाजपा ने 80 में से 53, भीलवाड़ा में 70 में से 45, जयपुर में 150 में से 78 और कोटा में 100 में से 55 वार्ड जीते हैं. इन चारों जगह पार्टी बहुमत के आंकड़े सेआगे है. यानी आंकड़े यह बता रहे है कि दस नगर निगमों का गणित भाजपा के लिए पूरी तरह एकतरफा नहीं है. भाजपा को चार निगमों में स्पष्ट बहुमत मिला है. 

जोधपुर और भरतपुर में बहुमत नही है, लेकिन सबसे बड़े दल के तौर पर है, ऐसे में निर्दलियों पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बना सकती है, दूसरी ओर बीकानेर में कांग्रेस के पास स्प्ष्ट बहुमत है. पाली अजमेर और अलवर में सबसे बड़े दल के तौर पर है, निर्दलियों के सहयोग से बोर्ड बना सकती है. ऐसे में निर्दलियों के समर्थन से संभावित आंकड़ा देखे तो 10 नगर निगम में से 7 में भाजपा और 3 में कांग्रेस अपना बोर्ड बना सकती है.

उदयपुर -  80 वार्ड में से BJP के पास 53 — बीजेपी स्पष्ट बहुमत
भीलवाड़ा -70 वार्ड में से BJP 45 — बीजेपी स्पष्ट बहुमत
कोटा -100 वार्ड में स्व BJP 55 — बीजेपी स्पष्ट बहुमत
जयपुर - 150 वार्ड में से BJP 78 — बीजेपी स्पष्ट बहुमत 
बीकानेर - 80 वार्ड में से BJP 27 , कांग्रेस 42 , निर्दलीय 5 - कांग्रेस स्प्ष्ट बहुमत 
अजमेर - 80 वार्ड में से कांग्रेस 37, BJP 32 , 11 निर्दलीय - कड़ा मुकाबला 
जोधपुर - 100 वार्ड में से BJP 44, कांग्रेस 44 , 10 निर्दलीय — कड़ा मुकाबला 
पाली - 65 वार्ड में से 21 BJP , 29 कांग्रेस और 15 निर्दलीय - कड़ा मुकाबला, निर्दलियों के सहयोग से कांग्रेस बोर्ड बना सकती है
अलवर -80 वार्ड में से 32 BJP , 37 कांग्रेस और 11 निर्दलीय - कड़ा मुकाबला , निर्दलियों के सहयोग से कांग्रेस बोर्ड बना सकती है
भरतपुर - 65 से से 20 BJP , 7 कांग्रेस और 36 निर्दलीय - निर्दलीयों के सहयोग से भाजपा का बोर्ड बन सकता है

47 नगर परिषद में से 12 नगर परिषदों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में है. इनमें पुष्कर में 25 में से 19 वार्ड भाजपा के पास हैं. बालोतरा में 55 में से 29, बांसवाड़ा में 60 में से 34, बाड़मेर में 55 में से 29, चित्तौड़गढ़ में 60 में से 33, निम्बाहेड़ा में 45 में से 27, डूंगरपुर में 40 में से 24, सुजानगढ़ में 60 में से 31, चौमूं में 45 में से 30, जैसलमेर में 45 में से 25, राजसमंद में 45 में से 27 और सवाई माधोपुर में 60 में से 33 वार्ड भाजपा के खाते में गए हैं. इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन ऐसी नगर परिषद है जहां बीजेपी स्पष्ट तो नही है लेकिन बहुमत के करीब है. यहां पर निर्दलियों के सहयोग से बीजेपी अपना बोर्ड बना कर संख्या बढ़ा सकती है.

--- BJP के स्पष्ट बहुमत वाली नगर परिषदें ---
नगर परिषद - कुल वार्ड - BJP 
 पुष्कर - 25 में से 19 
बालोतरा - 55 में से 29 
बांसवाड़ा - 60 से से 34 
बाड़मेर - 55 में से 29 
चित्तौड़गढ़ - 60 में से 33 
निम्बाहेड़ा - 45 में से 27 
डूंगरपुर - 40 में से 24 
सुजानगढ़ - 60 में से 31 
चौमूं - 45 में से 30 
जैसलमेर - 45 में से 25 
राजसमंद - 45 में से 27 
सवाई माधोपुर - 60 में से 33 

प्रदेश में कुल 252 नगर पालिकाएं हैं. इनमें भाजपा को करीब 70 नगर पालिकाओं में स्पष्ट बहुमत मिलने का आंकड़ा सामने आया है. इसका अर्थ यह है कि एक चौथाई से ज्यादा पर भाजपा पीछे रह गई. हालांकि कई जगह भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और उसे केवल कुछ निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बनाने का रास्ता मिल सकता है. वहीं कुछ निकायों में कांग्रेस या निर्दलीय सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. निकाय चुनाव में पार्षदों की संख्या और बोर्ड गठन दो अलग-अलग राजनीतिक चरण हैं. 

चुनाव परिणाम में सबसे ज्यादा सीटें जीतना एक बात है, जबकि अध्यक्ष या सभापति बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाना दूसरी. यही वजह है कि भाजपा अब उन निकायों पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है जहां पार्टी बहुमत के आसपास है. पार्टी संगठन की ओर से स्थानीय विधायकों, विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों और निकाय प्रभारियों को बोर्ड गठन की जिम्मेदारी दी जा रही है. जहां भाजपा को 50 प्रतिशत से ज्यादा वार्ड मिले हैं, वहां अध्यक्ष या सभापति के चुनाव को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत साफ है, लेकिन जहां पार्टी बहुमत से एक, दो, तीन या कुछ सीट दूर है, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है.स्पष्ट बहुमत वाले निकाय नहीं हैं, बल्कि भाजपा के कुल वार्ड प्रदर्शन और विभिन्न निकायों में पार्टी की बढ़त भी है. 

आयोग के अनुसार 10,235 वार्डों में भाजपा ने 4,179 वार्ड जीते, कांग्रेस को 3,613 और निर्दलीयों को 2,273 वार्ड मिले. आंकड़ा भाजपा के पक्ष में सबसे बड़ी पार्टी की स्थिति दिखाता है, लेकिन इसे 309 निकायों में स्पष्ट बहुमत के बराबर नहीं माना जा सकता. यानी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन निर्दलीयों का आंकड़ा भी इतना बड़ा है कि कई बोर्डों में उनकी भूमिका निर्णायक रहेगी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने परिणामों को पार्टी के लिए बड़ा जनादेश बताया है.

उधर जयपुर में बीजेपी के कुनबे में लगातार बढ़ोतरी. मेयर का चैन होने से पहले ही बीजेपी का कुनबा बढ़ चुका है. बीजेपी से बगावत करके लड़े और चुनाव जीतने वाले चेहरो ने पार्टी का दामन थामा है.