जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीजेपी कार्यालय में मीडिया से रूबरू हुए इस दौरान उनके साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, श्रवण बगड़ी, भूपेन्द्र सैनी भी भी मौजूद रहे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विपक्ष बार बार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की बातें कर रहा है. कांग्रेस झूठे तथ्यों के आधार पर चुनाव आयोग की छवि धूमिल कर रही है.
सर्वसम्मति से फैसला हुआ, इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी झूठे आरोप लगा रही है. एक अखबार की रिपोर्ट को आधार बनाकर आरोप लगाए गए हैं. अपनी चुनावी हार को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर कांग्रेस हमले कर रही है. कांग्रेस और विपक्ष सिर्फ झूठ और सनसनी फैलाने का काम कर रहे है. SIR को लेकर कांग्रेस द्वारा झूठा माहौल बनाया जा रहा है.
जनता कांग्रेस को पूरी तरह से नकार चुकी है:
कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया है. निर्वाचन आयोग को लेकर कांग्रेस के झूठे दावों का मूल आधार क्या है. संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि चाहिए होनी. न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना सरासर गलत है. कैबिनेट सेक्रेटरी के पत्रों को गलत तरीके से पेश किया गया है. जनता कांग्रेस को पूरी तरह से नकार चुकी है. कांग्रेस को जनता के बीच में जाकर काम करने की आदत डालनी चाहिए. अगर कांग्रेस ऐसे ही सनसनी फैलाएगी तो पार्टी रसातल में चली जाएगी.
कांग्रेसी अपनी हार ही नहीं, दूसरी पार्टी की जीत भी नहीं पचा पाते:
कांग्रेसी अपनी हार ही नहीं, दूसरी पार्टी की जीत भी नहीं पचा पाते है. देश की विपक्षी पार्टियां, कांग्रेस झूठे तथ्यों के आधार पर चुनाव आयोग की छवि धूमिल कर रही है. इस हफ्ते को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है. SIR सहित प्रमुख निर्णयों में तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से किया. चुनाव आयोग की बैठक में सहित तो प्रेस नोट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है.
कांग्रेस के द्वारा SIR को लेकर लगातार सवाल उठाए गए:
'मैं पूछना चाहता हूं कि निर्वाचन आयोग को लेकर कांग्रेस द्वारा जो झूठे दावे का आधार क्या ? जून, 24 जून 2025 को मूल आदेश हो, या अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए समयसारणी जारी की. आयोग ने कहा कि ये निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए है. 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया. कांग्रेस के द्वारा SIR को लेकर लगातार सवाल उठाए गए. कांग्रेस को देश को बताना चाहिए क्या न्याय प्रक्रिया के बाहर भी किसी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए जा सकते हैं?'
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को इस पूरे विवाद में आधार बनाया गया:
क्या उन आरोपों के पीछे ठोस तथ्य और प्रमाण नहीं होने चाहिए?' कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र, SIR और निर्वाचन आयोग की नीति से जोड़कर प्रस्तुत किया गया. निर्वाचन आयोग के अनुसार वह पत्र न तो किसी निजी विषय से संबंधित था और न ही SIR से संबंधित था. आयोग के अनुसार वह प्रतिनिधित्व पर आए अधिकारी प्रसाद ने कार्यालय से जोड़ा आंतरिक मामला था. एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को इस पूरे विवाद में आधार बनाया गया निर्वाचन आयोग ने उस रिपोर्ट को तथ्यहीन और काल्पनिक बताया.