नई दिल्ली : ग्लेशियर झीलों पर खतरे की आहट है. नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में GLOF को लेकर चिंता बढ़ी है. उत्तराखंड में ग्लेशियर लेक के खतरे पर USDMA अलर्ट के बाद एक्शन प्लान तैयार है. उत्तराखंड की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का 8 सितंबर से ग्राउंड सर्वे होगा.
देश के प्रमुख संस्थानों की एक्सपर्ट टीमें संवेदनशील झीलों का अध्ययन करेंगी. उत्तराखंड में करीब 450 ग्लेशियर लेक और 13 झीलें संवेदनशील श्रेणी में हैं. 13 में से 5 अति संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर निगरानी तेज है. चमोली और पिथौरागढ़ की संवेदनशील झीलों पर विशेषज्ञों की खास नजर है.
वसुधारा ताल, मांबग और प्यूंगरू समेत 5 झीलें A कैटेगरी में शामिल हैं. सरस्वती ताल और केदार ताल B कैटेगरी में, अन्य झीलें C श्रेणी में हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि ग्लेशियर झील का प्राकृतिक बांध टूटने पर घाटियों में अचानक बाढ़ आ सकती है. GLOF से मलबे और बोल्डर के तेज बहाव का खतरा बढ़ा है.