जयपुरः वागड़-मेवाड़ में दो धड़ों में बंटी कांग्रेस की राजनीति अब फिर से गरमाने लगी है. एक धड़े के नेताओं ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा से मुलाकात कर चुके हैं. नेताओं का दावा है कि कांग्रेस को मजबूत करने के लिए अहम सुझाव आलाकमान को दिए गए हैं, लेकिन सूत्रों की माने तो इन नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर शिकायतें की है. दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस ने इस क्षेत्र में मिशन मोड पर काम शुरू करके नई लीडरशिप तैयार करने का फैसला किया है. आखिर किस दिशा में आगे बढ रही है मेवाड़ व वागड़ में कांग्रेस की राजनीति.
वागड़-मेवाड़ की कांग्रेसी राजनीति अलग ही करवट ले रही है. इस क्षेत्र में कांग्रेस दो धड़ो में बंटी नजर आ रही है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली क्षेत्र में दौरा करके संविधान बचाओ रैली कर रहे हैं और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा भी लगातार कंधा से कंधा मिलाए हुए हैं, वहीं दूसरा धड़ा जो असंतुष्ट बताया जा रहा है और दिल्ली में डेरा डाल हुए हैं. इस धड़े में पूर्व सांसद रघुवीर मीना, ताराचंद भगौरा, सुरेंद्र बामनिया व प्रकाश चौधरी है. मंगलवार को इन नेताओं ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा से मुलाकात की, तो गुरुवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का दरवाजा खटखटा दिया.
गरमाने लगी है वागड़-मेवाड़ में कांग्रेस की राजनीति
कांग्रेस नेताओं ने दो धड़े बना लिए हैं इस क्षेत्र में
रघुवीर मीना, ताराचंद भगौरा, सुरेंद बामनिया व प्रकाश चौधरी हुए लामबंद
प्रदेश प्रभारी रंधावा से मिलकर कई शिकायतें की राजस्थान के बारे में
अब कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिले ये नेता
चारों ही नेता पिछले कुछ चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं
सलूंबर उपचुनाव में इनकी अलग भूमिका भी चर्चा में रही थी
आखिर क्या है पर्दे के पीछे की सच्चाई ?
क्या किसी के इशारे पर लामंबद हो रहे नेता ?
वहीं प्रदेश कांग्रेस अब वागड़ में नई लीडरशिप तैयार करने में जुटी
कुछ लोगों तक कांग्रेस के सीमित होने से क्षेत्र में हुआ बड़ा नुकसान
अब नए चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी कर चुकी है पीसीसी
हाल ही संविधान बचाओ रैलियां का हो चुका क्षेत्र में आयोजन
इन रैली में एक धड़े ने सक्रियता से हिस्सा लिया, दूसरे धड़े ने दूरी बनाई
एक धड़े ने भले ही दिल्ली में डेरा डाल रखा हो, लेकिन दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस मेवाड़ और वागड़ में अपने छिटके हुए आदिवासी वोट बैंक को फिर से साधने में जुट गई है. इन दोनों अंचलों में कुल 28 विधानसभा सीटें आती हैं. एक तो कांग्रेस के सबसे तेज-तर्रार नेता महेंद्रजीत मालवीय ने लोकसभा चुनावों में बीजेपी का दामन थाम लिया था तो दूसरी तरफ भारत आदिवासी पार्टी ने कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की थी. अब हाईकमान के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस वागड़-मेवाड़ में मिशन मोड पर काम करने में जुट गई है. कांग्रेस ने कार्यकर्ता सम्मेलनों की शुरुआत कर दी है. वहीं आदिवासियों के घरों पर रात्रि विश्राम करने औऱ उनके साथ भोजन करने जैसा कार्यक्रम भी चलाया जाएगा. बीएपी के बढ़ते जनाधार के चलते कांग्रेस के लिए वागड़ और उदयपुर अंचल में सियासी चुनौतियां अब काफी बढ़ चुकी हैं. वागड़ में बाप का जनाधार कितनी तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में बाप के पास मात्र एक विधायक था और 2023 में यहां इसके विधायकों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है. इसका सबसे ज्यादा खामियाजा कांग्रेस ने ही उठाया है. कांग्रेस ने यहां अपनी नई लीडरशिप को भी तैयार करने की रणनीति बनाई है, जिसके तहत युवा नेता और विधायक गणेश घोघरा को पिछले दिनों आदिवासी कांग्रेस की कमान दी गई है. वहीं पार्टी के पास यहां दयाराम परमार, अर्जुन बामनिया, नानालाल निनामा और रमिला खड़िया व दिनेश खोडनिया जैसे बड़े चेहरे हैं.