जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS में मरीजों की सेवा में लगे ठेका कार्मिकों की अब हाईटैक निगरानी होगी. अस्पताल प्रशासन ने बेहतर, पारदर्शी और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नियमित मेडिकॉज की तर्ज पर ठेका कार्मिकों की भी बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी है. नई व्यवस्था के तहत एक तरफ जहां सभी संवर्ग के ठेकाकर्मी रोजाना बायोमेट्रिक उपस्थिति देंगे, वहीं दूसरी ओर तीन तीन माह के रोटेशन पर उनकी जिम्मेदारी भी बदली जाएगी. आखिर क्या है अस्पताल प्रशासन की नई व्यवस्था और इससे पीछे की वजह.
दरअसल, SMS अस्पताल में मरीजों का दवाब किसी से छिपा नहीं है. दिन हो या रात, हर समय हजारों की तादात में मरीज अस्पताल में विभिन्न तरह की स्वास्थ्य सेवाएं लेते है. इस तरह के वर्कप्रेशर को देखते हुए प्रशासन को नियमित कार्मिकों के साथ साथ काफी संख्या में ठेकाकार्मिकों की सेवाएं भी लेनी पड़ती है. अकेले एसएमएस की बात की जाए तो डेढ़ दर्जन के आसपास की सेवाओं के लिए 600 से अधिक पाइंट निर्धारित है. जहां राउण्ड द क्लोक 2500 से अधिक ठेकाकर्मी मरीजों को सेवाएं देते है. लेकिन इस व्यवस्था की पुख्ता मॉनिटरिंग के अभाव में कई बार ऐसा देखा गया कि सिर्फ कागजों में ही पाइंट चल रहे है. मौके पर ठेकाकर्मी को लगाया ही नहीं जा रहा है. ऐसे कई प्रकरण सामने आने के बाद अब प्रशासन ने पहली बार ठेकाकार्मिकों की पूरी व्यवस्था को ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग से जोड़ने की कवायद शुरू की है. अस्पताल अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी ने इस संबंध में सभी सेवा प्रदाता एजेंसियों और फर्मों को निर्देश जारी कर दिए हैं. नई व्यवस्था के तहत एक अगस्त से पूरे अस्पताल में सभी ठेकाकर्मियों पर बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की गई है.
ठेकाकर्मियों का 60 करोड़ का सालाना बजट !
SMS अस्पताल में "मैनपावर" की ऑनलाइन मॉनिटरिंग से जुड़ी खबर
2500 से अधिक ठेकाकार्मिकों पर एक अगस्त से बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य
करीब डेढ़ दर्जन के आसपास अलग-अलग सेवाओं पर लागू की गई बायोमेट्रिक हाजिरी
अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड को देखते तो वॉर्ड बॉय, ट्रोली पुलर्स, मोर्चरी अटेंडेंट, हेल्पर
लेबोरेटरी अटेडेंट, वाहन चालक, इलेक्ट्रीशियन, फार्मासिस्ट,टेक्नीशियन,टेलीफोन ऑपरेटर,
मशीन विद मैन,मुख्य भवन सफाई,चरक भवन सफाई,ट्रोमा सेन्टर सफाई,धनवंतरी ओपीडी सफाई,
बीएमआरसी सफाई व्यवस्था का करीब आधा दर्जन के आसपास फर्मों को दिया हुआ है काम
फर्मों के मार्फत निर्धारित पाइंट पर राउण्ड द क्लोक करीब 2500 के आसपास कार्यरत है कार्मिक
अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी ने कहा कि ठेका कार्मिकों पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होते है
ऐसे में ये जरूरी समझा गया कि जितना पैसा खर्च हो रहा है, मरीजों को उतना फायदा मिले
इसलिए इस पूरी व्यवस्था की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की गई है
अस्पताल प्रशासन की माने तो ठेकाकर्मियों पर बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्यता से फर्जी उपस्थिति, अनियमितता और मैनपावर की कमी जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा. यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जिस स्थान पर जितनी मैनपावर स्वीकृत है, वहां उतने कर्मचारी वास्तव में ड्यूटी पर मौजूद रहें. प्रशासन ने केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति को ही अनिवार्य नहीं किया है, बल्कि कर्मचारियों के कार्यस्थल पर लंबे समय तक बने रहने की व्यवस्था में भी बदलाव किया है. नई व्यवस्था के तहत विशेष परिस्थितियों को छोड़कर प्रत्येक ठेका कार्मिक का हर तीन महीने में रोटेशन किया जाएगा. इसके अलावा सभी ठेकाकार्मिकों की नई आईडी भी बनाने के निर्देश दिए गए है, जिसमें आधार नम्बर समेत सम्पूर्ण जानकारी का उल्लेख किया गया है. प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यस्थलों पर पारदर्शिता बढ़ेगी, साथ ही जवाबदेही भी तय हो सकेगी. इसके अलावा किसी भी प्रकार की अनियमित गतिविधियों या भ्रष्टाचार की आशंकाओं को भी कम किया जा सकेगा.