जयपुर: राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने टिकट वितरण के तरीके में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. अब तक चली आ रही 'बंद लिफाफे' में खाली चुनाव चिन्ह भेजने की परंपरा खत्म होगी. पार्टी का दावा है कि इस बार प्रत्याशियों का चयन संगठन से मिले फीडबैक, स्थानीय मुद्दों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता के आधार पर किया जाएगा. इसे चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
कांग्रेस ने निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों को अंतिम दौर में पहुंचाने का दावा किया है. सबसे बड़ा बदलाव टिकट वितरण की प्रक्रिया में किया गया है. इस बार 'बंद लिफाफे' में खाली सिंबल भेजने की पुरानी व्यवस्था नहीं होगी. पार्टी का कहना है कि सक्रिय कार्यकर्ताओं, संगठन की राय और स्थानीय समीकरणों के आधार पर ही प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा. साथ ही चुनाव प्रचार भी स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर किया जाएगा. कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार टिकट वितरण का फैसला ऊपर से थोपने के बजाय संगठन के फीडबैक और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता के आधार पर होगा. अब देखना होगा कि नई रणनीति पार्टी के भीतर असंतोष कम करती है या चुनावी मैदान में कांग्रेस को राजनीतिक बढ़त दिला पाती है. राजनीतिक तौर पर इसे कांग्रेस की संगठन को मजबूत करने और टिकट वितरण में पारदर्शिता लाने की रणनीति माना जा रहा है. पार्टी स्थानीय मुद्दों को चुनाव का मुख्य आधार बनाकर भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में है. साथ ही सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देकर गुटबाजी और टिकट को लेकर होने वाले असंतोष को कम करने की भी कोशिश है.
टिकट से पहले कांग्रेस ने की तैयारी
-विवादों के बीच पूरे प्रदेश में आयोजित की गई बैठकें
-करीब 14 हजार ग्राम पंचायत में समितियों का गठन किया जा चुका है
-इन समितियों की एक-एक बैठक भी कर ली गई है
-निकाय चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में 10 हजार से अधिक वार्ड कमेटी बनाई गई
-इन वार्ड कमेटी ने हाल ही स्थानीय स्तर पर बैठक आयोजित की
-लगभग 250 नगर कांग्रेस कमेटियों की बैठक से भी फीडबैक लिया जा चुका है
पार्टी नेतृत्व ने सभी जिलों से 3 अगस्त तक फीडबैक रिपोर्ट मांगी थी. अब सभी रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय पहुंच चुकी हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी उनका अध्ययन कर चुके हैं. इसी फीडबैक के आधार पर हर क्षेत्र के लिए जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और टिकट वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. बताया यह जा रहा है कि इस बार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रमुख नेताओं की आमराय के आधार पर टिकट का फैसला किया जाएगा. अब खाली सिंबल बंद लिफाफे में नहीं दिए जाएंगे कि कोई भी एक नेता अपनी मर्जी से किसी को भी चुनाव लड़ा दे. प्रत्येक उम्मीदवार की जिम्मेदारी उस क्षेत्र के नेता को लेनी होगी, जो टिकट के लिए उम्मीदवार का नाम लेकर आया. इस आधार पर ही चुनाव परिणाम के बाद उस नेता की रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी. अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह नया फॉर्मूला चुनावी मैदान में कितना कारगर साबित होता है और क्या संगठन की राय को प्राथमिकता देने की रणनीति पार्टी को राजनीतिक बढ़त दिला पाती है.