जयपुर: वर्ष 2025 प्रदेश के नगरीय विकास व स्वायत्त शासन क्षेत्र के लिहाज से काफी अहम रहा. इस वर्ष राज्य सरकार की ओर से नियोजित विकास के लिए नए प्रावधान किए गए साथ ही आमजन के हित को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले किए गए. वर्ष 2025 में राज्य सरकार के नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से आम शहरी को उसकी जमीन का पट्टा देने, उस उसकी खुद की छत उपलब्ध कराने और नगरीय निकाय से जुड़ी सेवाओं को सुगमता उपलब्ध कराने के लिहाज से बड़े फैसले किए गए.
पुरानी आबादी क्षेत्र में बसे लोगों राहत:
8 अक्टूबर 2025:
-प्रदेश की भजनलाल सरकार शहरों में पुरानी आबादी क्षेत्र में बसे लोगों को राहत दी
-इन लोगों को उनके भूखंड का मिल सके मालिकाना हक
-इसके लिए सरकार ने प्रक्रिया को किया आसान
-पहले शहरी सेवा शिविर और अब चलाए जाने वाले शहरी समस्या समाधान शिविर के लिए प्रक्रिया को किया आसान
-300 वर्ग मीटर तक के भूखंडों का लेकर प्रक्रिया की आसान
-अब इन भूखंडों का पट्टा लेने के लिए नहीं होगा जरूरी
-लोगों को भूखंड के स्वामित्व के दस्तावेज देना नहीं होगा जरूरी
-भूखंड का पट्टा लेने के लिए अब लोगों को करने होंगे प्रस्तुत
-सामान्य वर्ग के लोगों को 1 जनवरी 1990 से पहले के और
-एससी-एसटी वर्ग के लोगों को निकाय में करने होंगे प्रस्तुत
-1 जनवरी 1996 से पहले के भूखंड पर कब्जे के देने होंगे दस्तावेज
-पहले अभियान में ऐसे मामलों में पट्टा लेने के लिए था जरूरी
-भूखंड के स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करना था जरूरी
-पुरानी आबादी क्षेत्र में बसे अधिकतर लोगों के पास नहीं हैं दस्तावेज
-अधिकतर लोगों के पास नहीं हैं स्वामित्व के दस्तावेज
-इन दस्तावेजों के अभाव में लोगों को नहीं मिल पा रहा था पट्टा
-लेकिन अब कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर मिल सकेगा पट्टा
-निर्धारित तिथि से पहले के ये दस्तावेज करने होंगे प्रस्तुत
-बिजली-पानी के बिल,वोटर आईडी,राशन कार्ड,
-निष्पादित बेचान पत्र,पारिवारिक बंटवारानामा,
-आवेदन के साथ इनमें से उपलब्ध दस्तावेज निकाय में देने होंगे
-इन दस्तावेजों के आधार पर भूखंड का मिल सकेगा पट्टा
शहरी सेवा शिविर:
सितंबर,अक्टूबर और दिसंबर:
-निकायों से जुड़ी सेवाएं सुगमता से उपलब्ध कराने व शहरी समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए शहरी सेवा शिविर शुरू किए गए
-17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश भर के निकायों में शहरी सेवा शिविर लगाए गए
-इसके बाद 3 नवंबर से 7 नवंबर तक इसके फॉलोअप शिविर भी लगाए गए
-इन शिविरों में पट्टों से संबंधित प्रकरणों में 39 हजार 800 प्रकरणों का निस्तारण किया गया था
-इसी के साथ ही अन्य भूमि से संबंधित प्रकरणों में 20 हजार 888 प्रकरणों का निस्तारण भी किया गया
-जिनमें नाम हस्तान्तरण के 10 हजार 30 प्रकरण, यू.डी. टैक्स के 3 हजार 987 प्रकरण,
-भवन मानचित्र के 3 हजार 554 प्रकरण, भूखण्डों के उप विभाजन/पुर्नगठन के 1 हजार 753 प्रकरण,
-निर्माण अवधि विस्तार के 776 प्रकरण, नगरीय विकास/आवासन मण्डल द्वारा ब्याज छूट देकर की गई वसूली के 365 प्रकरण और
-भू-उपयोग परिवर्तन के 423 प्रकरणों को स्वीकृत किया गया
-और घर-घर कचरा संग्रहण के 43 हजार 269 प्रकरणों का भी निस्तारण एवं
-व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के 4 हजार 977 आवेदनो का अनुमोदन कर प्रथम किश्त जारी करने के प्रकरण शामिल है
-राज्य सरकार के दो वर्ष पूरा होने के मौके पर भी 16 दिसंबर से 24 दिसंबर तक शहरी समस्या समाधान शिविर आयोजित किए गए
गरीबों को उनका आशियाना देने कवायद:
17 अक्टूबर 2025
-मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत विभिन्न योजनाओं में गरीबों के लिए बनाए जा रहे 19 हजार से अधिक मकानों का निर्माण अधूरा था
-इन अधूरे पड़े मकानों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने 200 करोड़ के कॉरपस फंड की मंजूरी दी
-गरीब आवंटियों से समय पर राशि नहीं मिलने के कारण इन मकानों का अधूरा था
-इस कॉरपस फंड से बालोतरा में 480,ब्यावर में 794,भीलवाड़ा में 560,बूंदी में 716,फालना में 504,हिंडौनसिटी में 659,
-झालावाड़ में 914,जोधपुर में 9552,केकड़ी में 656,केशोरायपाटन में 743,खेतड़ी में 544,निम्बाहेड़ा में 491,पाली में 912,
-पुष्कर में 535,राजसमंद में 302, रावतभाआ में 1168 और सिरोही में 400 मकानों का काम पूरा हो सकेगा
-इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 में राजस्थान ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है
-इस योजना के तहत राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार 12 हजार से अधिक आवासों की मंजूरी दे चुकी है
-पहली किश्त के तौर पर केन्द्र सरकार के 74 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे चुकी है
-लाभार्थी परिवारों को चार किश्तों में मिलेंगे ढाई लाख रुपए
-आवास निर्माण के लिए चार किश्तों में दी जाएगी यह राशि
-पहली किश्त के तौर पर दिए जाएंगे पचास हजार
-प्लिंथ लेवल तक निर्माण होने पर दी जाएगी दूसरी किश्त
-दूसरी किश्त होगी पचास हजार रुपए की
-लिंटल लेवल तक निर्माण होने पर दिए जाएंगे एक लाख रुपए
-ताकि लाभार्थी अपने आवास की डाल सके छत
-आवास का निर्माण पूरा होने जारी की जाएगी चौथी किश्त
-इस किश्त में दिए जाएंगे शेष पचास हजार रुपए
वर्ष 2025 में राज्य सरकार की ओर से शहरों के योजनाबद्ध विकास के लिए नई नीति और नए नियम लागू किए गए. शहरी लोगों को विभिन्न सुविधाएं देने के लिए भूमि की उपलब्धता को लेकर नई नीति लागू की गई. इसके साथ ही राजधानी की सार्वजनिक शहरी भवन में सुधार के लिए जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की डीपीआर मंजूरी के लिए केन्द्र सरकार को भेजी गई.
नई टाउनशिप नीति:
17 जुलाई 2025:
-प्रदेश में इस वर्ष 17 जुलाई को नई टाउनशिप नीति लागू की गई
-इस नीति के प्रदेश में पहली बार नए प्रावधान लागू किए गए-नई नीति में विभिन्न जल स्त्रोत नदी,नाला,तालाब,नहर,बरसाती नाला,झील के संरक्षण के लिए इनके दोनों तरफ न्यूनतम बफर जोन का प्रावधान किया गया है
-सभी योजनाओं में रैन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट वाटर रिसाइकल के प्रावधान किए गए हैं
-पार्क अथवा खुले स्थानों में सामुदायिक रैन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट वाटर रिसाइकल निर्मित किए जा सकेंगे
-फेज्ड डवलपमेंट का प्रावधान नई नीति में किया गया है, इसके लिए अलग से नीति बनाई जाएगी
-जेडीए की सेक्टर कमर्शियल पॉलिसी की तर्ज पर इस नीति के तहत अन्य शहरों में भी सेक्टर सड़कों का निर्माण किया जा सकेगा
-सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए राजस्व रिकॉर्ड में पहुंच मार्ग दर्ज होने और
-पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई की बाध्यता लागू नहीं होगी
-औद्योगिक योजनाओं में श्रमिकों के निवास के लिए योजना का 5 प्रतिशत क्षेत्रफल आरक्षित रहेगा
-इस पांच प्रतिशत हिस्से में भूतल और ऊपरी दो मंजिला इमारत में ईडब्लूएस व एलआईजी वर्ग के लिए आवासों का निर्माण किया जाएगा
-इस प्रावधान से श्रमिकों को औद्योगिक इकाई के नजदीक ही आवास उपलब्ध हो सकेंगे
-पुरानी टाउनशिप नीति के कई प्रावधानों से अधिक प्रभावी प्रावधान इस नई टाउनशिप नीति में लागू किए गए
-पहले लागू टाउनशिप नीति में पार्क,खेल का मैदान व जन सुविधाओं के लिए पर्याप्त व कारगर प्रावधान नहीं थे
-इसी तरह योजना के समग्र आंतरिक विकास को लेकर भी संबंधित विकासकर्ता बाध्य नहीं थे
-पुरानी नीति की इन तमाम कमियों को देखते हुए भूखंडधारियों को विभिन्न आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से नई टाउनशिप नीति में कई प्रभावी प्रावधान किए गए हैं
मॉडल भवन विनियम किए लागू:
12 मई 2025:
-प्रदेश भर के शहरों में लागू किए गए नए भवन विनियम
-नगरीय विकास विभाग ने 12 मई का लागू किए नए भवन विनियम
-नए भवन विनियमों में किए गए हैं महत्वपूर्ण प्रावधान
-कम चौड़ी सड़कों व छोटे भूखंडों पर विभिन्न गतिविधियां कम करने
-और भूमि के अधिकतम उपयोग के लिए किए गए हैं प्रावधान
-बहु निवास इकाईयों में अधिकतम बन सकेंगी 8 इकाईयां
-18 के बजाए15 मीटर से ऊंची इमारतें कहलांएगी बहुमंजिला इमारतें
-बहुमंजिला वाणिज्यक इमारतों के निर्माण के लिए होगी जरूरी
-60 फीट के बजाए न्यूनतम 80 फीट चौड़ी सड़क होगी जरूरी
-बहु मंजिला इमारत में रहेगा अधिकतम सेटबैक 16 मीटर
-रूफटॉप रेस्टोरेंट्स,विवाह स्थल और हॉस्टल के लिए कड़े प्रावधान
-चिकित्सा संस्थानों व वाणिज्यक इमारतों में होगा जरूरी
-न्यूनतम पार्किंग का 50% विजिटर पार्किंग रखना होगा जरूरी
-ग्रीन बिल्डिंग्स को बढ़ावा देने के लिए किए गए हैं प्रावधान
निकायों का ऐतिहासिक सशक्तिकरण:
28 मार्च 2025:
-भजनलाल सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए निकायों के अधिकारों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की
-इस वर्ष 28 मार्च को नगरीय विकास विभाग ने अधिसूचना व आदेश किए थे जारी
-पट्टा जारी करने के निकायों के अधिकारों में दो से ढाई गुना की बढ़ोतरी की गई
-पुर्नगठन/उप विभाजन में निकायों के अधिकारों में दो से बीस गुना की बढ़ोतरी की गई
-प्राधिकरण व उनके मुख्यालयों के निकाय अब दे रहे हैं स्वीकृति
-40 के बजाए 60 मीटर तक की ऊंचाई की इमारतों के निर्माण की दे रहे हैं स्वीकृति
-यूआईटी व उनके मुख्यालयों के निकाय अब दे रहे हैं स्वीकृति
-30 के बजाए 40 मीटर तक की ऊंचाई की इमारतों के निर्माण की दे रहे हैं स्वीकृति
-निकायों के इस ऐतिहासिक सशक्तिकरण से आमजन व निवेशकों को मिल रही है राहत
-मामले राज्य सरकार को भेजने व उन पर मंजूरी में लगने वाले समय में हो रही है बचत
-पहले से काफी कम समय में प्रकरण निकाय स्तर पर हो रहे हैं निस्तारित
नई भूमि आवंटन नीति की लागू:
2 सितंबर 2025:
-राज्य सरकार ने 2 सितंबर को अधिसूचना जारी कर नई आवंटन नीति लागू की
-नई आवंटन नीति के तहत जब भी किसी निकाय को मिलेगा आवंटन का आवेदन
-तो उस भूमि आवंटन के आवेदन पर मांगी जाएंगी आपत्ति
-इसके लिए निकाय अपनी वेबसाइट पर डालेंगे आवेदन
-न्यूनतम 15 दिन के लिए वेबसाइट पर डालेंगे आवेदन
-सक्षम स्तर पर भूमि आवंटन का फैसला होने पर किया जाएगा जारी
-निकाय को 15 दिन में आवंटन एवं मांग पत्र किया जाएगा जारी
-निजी संस्थानों को निवेश की गारंटी पर भूमि की जाएगी आवंटित
-गारंटी के तौर पर संस्थान के बैंक खाते में होनी चाहिए अतिरिक्त राशि
-न्यूनतम 50 करोड़ के निवेश पर की जा सकेगी भूमि आवंटित
-होटल के लिए 3000 वर्ग मीटर भूमि की जा सकेगी आवंटित
-बड़े अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के लिए भी दी जा सकेगी भूमि
-न्यूनतम 300 बेड्स के लिए दी जा सकेगी भूमि
-न्यूनतम 500 करोड़ के निवेश पर दी जा सकेगी भूमि
-विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय विस्तार के लिए मिल सकेगी भूमि
न्यूनतम 300 करोड़ के निवेश पर मिल सकेगी भूमि
-संभागीय मुख्यालय में अधिकतम 20 एकड़ और
-अन्य शहरों में 20 एकड़ तक आवंटित की जा सकेगी भूमि
जयपुर मेट्रो परियोजना का दूसरा चरण:
मई 2025:
-राज्य सरकार ने जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण पर काम शुरू कर दिया है
-दूसरे चरण की डीपीआर स्वीकृति के लिए इस वर्ष केन्द्र सरकार को भेजी गई
डीपी
-जल्द ही इस डीपीआर पर केन्द्र सरकार की ओर से मंजूरी दे दी जाएगी
-दूसरे चरण में प्रहलादपुरा रिंग रोड से लेकर विद्याधर नगर टोड़ी मोड़ तक मेट्रो चलेगी
-42.80 किलोमीटर लंबे इस दूसरे चरण की लागत है 12 हजार 260 करोड़ रुपए
-इसी वर्ष मौके पर काम शुरू करने के लक्ष्य के साथ राजस्थान मेट्रो रेल -कॉर्पोरेशन तैयारी कर रहा है
-दूसरे चरण को सात पैकेजों में बांट दिया गया है
-पहले पैकेज में मेट्रो चलाने के लिए निविदा भी जारी कर दी गई है
-पहले पैकेज में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गौशाला तक मेट्रो चलाई जाएगी
-इस पैकेज के लिए 12 दिसंबर को निविदा खोली जाएगी