स्वाधीनता आंदोलन में RSS की भूमिका, जयपुर के शिक्षकों ने किया शोध, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः कांग्रेस के बड़े नेता ये आरोप कई बार लगाते है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लिया. लेकिन  स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर शोधकार्य पूरा हुआ हैं. “स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका: एक शैक्षिक एवं ऐतिहासिक अवलोकन” विषय पर शोधार्थी सुमन चौधरी ने डॉ. कविता शर्मा एवं प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा के निर्देशन में अपना शोधकार्य पूरा किया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार वर्ष 1921 में छह माह तक जेल में रहे. न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा था कि हेडगेवार ने जो बचाव के लिए दलील दी है वह अंग्रेजों के खिलाफ है. जब दलील वे इस तरह दे सकते हैं तो स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका अंग्रेजों के खिलाफ कितना खतरनाक होता होगा इसलिए इन्हें छह माह सश्रम कारावास दिया जाय. हेडगेवार छह माह जेल में रहकर जब वे वहां से निकले, उनके स्वागत और सम्मान का भव्य आयोजन लोगों ने किया काफी संख्या में लोग उमड़े  स्वतंत्रता सेनानी हेडगेवार के नारे लगाए गए ये सब तथ्य शामिल एक ऐसे शोध में जो राजस्थान में हुआ है “स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका: एक शैक्षिक एवं ऐतिहासिक अवलोकन” विषय पर शोध किया गया हैं. शोधार्थी सुमन चौधरी ने डॉ. कविता शर्मा एवं प्रोफेसर वेद प्रकाश शर्मा के निर्देशन में अपना शोधकार्य पूरा किया है. शोध में निहित है कि संघ ने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया. स्वयंसेवकों को भारतीय वस्तुओं के उपयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया. उल्लेखनीय है महात्मा गांधी ने स्वदेशी की अलख जगाई थी उस समय स्वदेशी केवल आर्थिक विषय नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मसम्मान से भी जुड़ा हुआ था.

---शोध के प्रमुख तथ्य ---
स्वाधीनता आंदोलन में संघ की शाखाओं का अहम योगदान रहा
राष्ट्रवादी चेतना के निर्माण में भूमिका रही
शाखाओं में अनुशासन, शौर्य, सेवाभाव, त्याग की भावना ने समाज में राष्ट्रीय मनोबल बढ़ाया

शोध के अनुसार एच वी शेषाद्रि की आर एस एस ए विजन इन एक्शन पुस्तक ये बताती है कि औपनिवेशिक शिक्षा के खिलाफ संघ विचार आम जन में अहम साबित हुए थे जिन्होंने राष्ट्रवाद की अलख जगाई.
..एंडरसन, डब्लू के और डेमले ने द ब्रदरहुड इन सैफरॉन द राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एंड हिंदू रिवाइवलिजम में लिखा कि स्वाधीनता आंदोलन में चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर RSS का जोर एक रणनीतिक विकल्प था जिससे संगठन को औपनिवेशिक अधिकारियों के साथ सीधे टकराव से बचने और कार्यकर्ताओं का एक प्रतिबद्ध कैडर बनाने की अनुमति मिली

शोध में लिखा है कि आर एस एस और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के बीच सम्बन्ध जटिल और अक्सर विरोधाभासी थे जबकि आर एस एस के संस्थापक डॉ हेडगेवार ने 1921 के असहयोग आंदोलन में भाग लिया था उन्हें जेल में डाला गया. द्वितीय सर संघचालक गुरु गोलवलकर ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को सामने रखा 

कई ऐसे तथ्य भी है जो संघ पर लिखी पुस्तकों से सामने आ चुके है इनमें प्रमुख हैं. शोध के जरिए बेहद गहराई से विश्लेषण किया गया हैं.

--कांग्रेस से प्रभावित आर एस एस!
इंडियन नेशनल कांग्रेस का नेशनल शब्द का मराठी में पर्यायवाची है राष्ट्रीय. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रथम अक्षर यहीं से लिया गया है. खास बात है डॉ हेडगेवार के समक्ष सुझाव आया हिन्दू स्वयंसेवक संघ लेकिन उन्होंने इस विशुद्ध हिन्दूवादी संगठन की नींव हिन्दू शब्द से नहीं रखी और इंडियन नेशनल कांग्रेस से शब्द प्राप्त किया. उस वक्त डॉ हेडगेवार ने स्वयंसेवको से कहा था 'कांग्रेस ने आजादी आंदोलन का राष्ट्रीय कार्य हाथ में लिया है ,हम भी राष्ट्रीय कार्य करेंगे'. आर एस एस के प्रथम अक्षरों की नींव यूं पड़ी थी. कांग्रेस के अधिवेशनों में स्वयंसेवकों के जिम्मे व्यवस्थाएं होती थी,खुड हेडगेवार ने कांग्रेस में रहते हुये यह कार्य किया था लिहाजा यहीं से दूसरा शब्द का आविष्कर हुआ यह था स्वयंसेवक.

--पं नेहरु के प्रयासों का समर्थन और 27जनवरी
1929 के अंत में कराची अधिवेशन में पं जवाहर लाल नेहरू ने संपूर्ण स्वातंत्र्य का प्रस्ताव पारित किया. ऐलान किया 26जनवरी 1930को स्वतंत्रता दिवस संपूर्ण देश में मनाया जायेगा. पं नेहरु की घोषणा का डॉ हेडगेवार ने समर्थन किया. सभी स्वयंसेवकों से कहा 26जनवरी 1930को शाम ठीक 6बजे संघ स्थानों पर स्वयंसेवक सभा करे और कांग्रेस के ध्येय को अपना समर्थन देते हुये भगवा ध्वज का वंदन करे. स्वाधीनता के अर्थ पर बौद्धिक भी रखे.

--गांधी जी का दांडी सत्याग्रह, संघ का जंगल सत्याग्रह
गांधी जी के नमक कानून तोडने से जुड़े सत्याग्रह का डॉ हेडगेवार ने समर्थन किया. और लोकनायक अणे के जंगल सत्याग्रह में भाग लिया. संरक्षित वन क्षेत्र में जाकर हंसिये से घास काटना यह सत्याग्रह का स्वरुप था. क्योंकि वे नमक वाले स्थान पर जा नहीं पाये थे. लेकिन जंगल सत्याग्रह के वक्त उन्हें अंग्रेजी पुलिस ने गिरफ्तार कर अकोला की जेल में डाल दिया.

--गांधी जी और संघ 
महात्मा गांधी और आर एस एस को लेकर कई तरह की बातें है सच यह है कि वर्धा में गांधी जी के सत्याग्रह शिविर के सामने संघ ने अपना शीतकालीन शिविर लगाया था. गांधी जी को शिविर के बारे में पता लगा तो उन्होंने महादेव भाई से कहा और इसे देखने की इच्छा जताई,गांधी जी संघ के शिविर में पहुंचे. 1500स्वयंसेवकों ने उन्हें मान वंदना दी, गांधी जी भी ने स्वयंसेवकों के समान ध्वज प्रणाम किया. शिविर का अनुशासन देख उन्हें अच्छा लगा.    

शोध में आर.एस.एस. के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का मानना था कि भारत की स्वतंत्रता के लिए न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की आवश्यकता है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी जरूरी है. उनका विश्वास था कि एक मजबूत और एकजुट भारत ही ब्रिटिश शासन से मुक्ति पा सकता है.