नई दिल्ली : भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा. इस सम्मेलन में दुनिया की बड़ी ताकतें एक साथ एक ही मंच साझा करतीं नजर आएंगी. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 आयोजन मे करेंसी और देश की मुद्राओं को लेकर बड़ा निर्णय लिया जाएगा.
“BRICS की साझा मुद्रा” बनाने की नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्राओं और क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट को आसान बनाना है. BRICS में डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम है. सम्मेलन से पहले वैश्विक भुगतान व्यवस्था को लेकर बड़ी पहल सामने आई है. भारत BRICS देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है.
भारत का फोकस सदस्य देशों की अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार और भुगतान को आसान, तेज और कम लागत वाला बनाने पर है. रूस के मुताबिक, BRICS देशों के साथ उसके करीब 90 फीसदी लेन-देन राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे है. भारत की पहल के तहत डिजिटल रुपया समेत BRICS देशों की CBDC व्यवस्था के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर चर्चा हो रही है.
ताकि सीमा पार भुगतान में मौजूदा जटिलताओं और लागत को कम किया जा सके. इसके साथ ही UPI जैसे तेज भुगतान सिस्टम को दूसरे BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर है. हालांकि, भारत फिलहाल किसी साझा BRICS मुद्रा या डॉलर को तत्काल खत्म करने की योजना के बजाय व्यावहारिक डिजिटल भुगतान व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है.
CBDC को आपस में जोड़ने की पहल के सामने तकनीकी, नियामकीय और राजनीतिक चुनौतियां भी ऐसे में नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में इस दिशा में सहमति और आगे की रूपरेखा पर दुनिया की नजर रहेगी. यानी BRICS में फिलहाल ‘एक साझा मुद्रा’ से ज्यादा जोर है. स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और वैकल्पिक डिजिटल भुगतान ढांचे पर है.