जयपुरः अलसी के डंठल से प्राकृतिक रेशे व कपड़े बनेंगे. किसानों व कंपनियों के बीच तालमेल से समृद्धि की राह खुली है. अब तक चीन,फ्रांस और यूक्रेन जैसे देशों से कच्चा माल मंगवाया जाता था. अब किसान लिनिन के महंगे कपड़े, करेंसी पेपर सहित सिगरेट पेपर बनाने वाली कंपनियों को अलसी के डंठल सप्लाई करेंगे.
कृषि अनुसंधान केन्द्र सागर की पहल पर किसानों व कंपनियों के बीच तालमेल कराया. किसानों को अब अलसी के डंठल एकत्रित करने से लेकर परिवहन तक के भार के अनुसार भुगतान मिलेगा. अलसी के रेशों से पैराशूट की रस्सी, दरी, पर्दे, वॉलपेपर, पेंटिंग पेपर, कैनवस, सिगरेट व करेंसी पेपर बनाए जाते हैं. प्रति हैक्टेयर अब किसानों को 90 हजार रुपए तक का मुनाफा होगा.