VIDEO: कांग्रेस में 'आलाकमान' की सियासत, चौथी बार गहलोत सरकार के नारों से शुरू हुआ विवाद, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में इन दिनों सियासत मुद्दों पर कम और नारेबाज़ी और नेतृत्व पर ज़्यादा हो रही है. 'चौथी बार गहलोत सरकार' के नारों से शुरू हुआ विवाद अब 'राजस्थान कांग्रेस का आलाकमान कौन?' तक पहुंच गया है. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी, अशोक गहलोत का जवाब, फिर शांति धारीवाल का बड़ा बयान और उसके बाद नेताओं के अलग-अलग सुर. इन सबने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है. 

पिछले सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास लगा यह नारा प्रदेश की सियासत में उबाल ले आया. वागड़ से आए जोशीले कार्यकर्ताओं ने चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाए, तो बात दूर तलक चली गई. नारेबाजी पर सियासत ने तब नई करवट ले ली, जब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि नारे तो पहले भी लगे थे, लेकिन नारों का रिजल्ट नहीं आया. मै जब तक हूं सिर्फ कांग्रेस के नारे लगाऊंगा किसी व्यक्ति के नारे नहीं लगाऊंगा. कोई व्यक्ति अपनी ब्रांडिंग के लिए काम करता है वो उनको मुबारक हो, मैं किसी की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करता. बस यहीं से कांग्रेस की राजनीति में बवाल मच गया. इसके जवाब में अशोक गहलोत ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि मेरे नारे लगे लेकिन दिल की बात कार्यकर्ता जुबान पर लाते हैं, तो उसे कैसे रोक सकते हैं.

अभी नारेबाजी का मामला शांत हुआ ही नहीं कि गहलोत सरकार में मंत्री रहे शांति धारीवाल ने बड़ा बयान देकर कह दिया कि राजस्थान में अशोक गहलोत ही कांग्रेस के आलाकमान हैं. उनके इस बयान ने प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नई बहस छेड़ दी.

धारीवाल के बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता आर.आर. तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान कांग्रेस का आलाकमान अशोक गहलोत ही हैं, जबकि एआईसीसी अपनी जगह है. गहलोत के समर्थन में लगे नारों पर उन्होंने कहा कि हर पार्टी में कुछ लोग ऐसे होते हैं और "आधा भरा हुआ मटका छलकता है, पूरा मटका नहीं छलकता."

वहीं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस पूरे विवाद से दूरी बनाते हुए साफ कहा कि कांग्रेस का आलाकमान केवल राहुल गांधी हैं. उन्होंने शांति धारीवाल के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी उम्र काफी ज्यादा है, वे कुछ भी कह सकते हैं, उन्हें कौन रोक सकता है.

राजस्थान कांग्रेस में नारेबाजी से शुरू होकर आलाकमान तक पहुंची बयानबाज़ी ऐसे समय सामने आई है, जब पार्टी को निकाय व पंचायत चुनाव की तैयारी पर फोकस करना है. राजस्थान कांग्रेस के  'आलाकमान' को लेकर अलग-अलग नेताओं के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व की धारणा को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं. हालांकि, आधिकारिक तौर पर कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व राहुल गांधी और एआईसीसी के हाथ में ही माना जाता है, लेकिन राज्य स्तर पर अशोक गहलोत के प्रभाव को लेकर छिड़ी बहस ने सियासी हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है.