जयपुर: पूर्व सीएम अशोक गहलोत के एक बयान से फिर कांग्रेस की सियासत और गुटबाजी गरमा गई है.गहलोत ने निकाय चुनाव के नतीजों को लेकर अपनी ही पार्टी के संगठन और रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.गहलोत का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पार्टी निकाय चुनाव प्रमुख के लिए अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीयों को भी रिझाने में लगी हुई है.
निकाय चुनाव के नतीजों को लेकर एक तरफ जहां प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा भाजपा और कांग्रेस में केवल एक फीसदी वोट का अंतर रहने का तर्क देते हुए बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रहे है.तो वहीं पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने डोटासरा से अलग अपनी राय जाहिर की है.गहलोत ने तो पीसीसी की रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए है.गहलोत ने कहा कि सरकार के खिलाफ जब इतनी नाराजगी थी वो वोट कांग्रेस को क्यों नहीं मिले.गहलोत यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि पीसीसी को और बेहतर प्लानिंग करनी थी और सीएम के रोड़ शो के जवाब में हमें भी रोड़ शो करने थे.
अशोक गहलोत के बयान की यह टाइमिंग नोटिस करने लायक है.क्योंकि एक तरफ जहां निकाय प्रमुखों के चुनाव अभी जारी है.कांग्रेस अपने पार्षदों को तोड़ फोड़ से बचाने के लिए लगातार मशक्कत कर रही है.साथ ही निर्दलीय पार्षदों पर डोरे डालने की भी कवायद में जुटी हुई है.इस बीच गहलोत ने बयानों के बम फोड़कर कईं चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है.गहलोत ने तो यहां तक कहा कि जब पूरे स्टेट में संगठन के नेटवर्क का जाल बिछा हुआ है तो फिर आखिर निर्दलीय 28 फीसदी वोट कैसे ले गए.
गहलोत के चलते निकाय चुनाव की जंग की बीच यह बयान बहुत कुछ मायने रखता है.बयानों की बौछार बताती है कि गहलोत और डोटासरा के बीच ऑल इज वैल बिल्कुल नहीं है.जैसे ही गहलोत का बयान सामने आय़ा तो सोशल मीडिया पर दोनों के समर्थकों में घमासान मच गया.राजनीति के जानकारों को यह अच्छे से पता है कि गहलोत कोई भी बयान कभी हवा में नहीं देते.लेकिन चाहे कुछ भी हो लेकिन गहलोत की बयानबाजी से एक बार फिर कांग्रेस की अंतर्कलह फिर सामने आ चुकी है.