Rajasthan: टाउनशिप नीति में बड़े बदलावों की तैयारी, रियल एस्टेट में निवेश को बढ़ावा देना है उद्देश्य

Rajasthan: टाउनशिप नीति में बड़े बदलावों की तैयारी, रियल एस्टेट में निवेश को बढ़ावा देना है उद्देश्य

जयपुर: प्रदेश में टाउनशिप योजनाओं के विकास में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए अशोक गहलोत सरकार गंभीर है. इसी लिहाज से टाउनशिप नीति में बड़े बदलावों की तैयारी की जा रही है.

मौजूदा टाउनशिप नीति वर्ष 2010 में लागू की गई थी. इस नीति के तहत ही प्रदेश के शहरों में टाउनशिप योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं. प्रमोटर्स की ओर से सरकार को फीडबैक मिला है कि नीति के मौजूदा प्रावधानों व कई प्रावधानों में अस्पष्टता के चलते कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसी के मद्देनजर टाउनशपि नीति में बदलाव की कवायद शुरू की गई है. बदलावा के लिए जारी किए जाने वाले परिपत्र का ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है. आपको सबसे पहले बताते हैं कि किस प्रकार के बदलाव टाउनशिप नीति में प्रस्तावित किए गए हैं.

टाउनशिप नीति में प्रस्तावित बदलाव:-

- जिन योजनाओं में हाईटेंशन लाइन अथवा मास्टरप्लान व सेक्टर प्लान की अधिक सड़कों के कारण सड़कों का क्षेत्रफल 20-22 प्रतिशत से अधिक होगा. 

- ऐसी योजनाओं में हाईटेंशन लाइन क्षेत्र की गणना सड़क, पार्क, ओपन स्पेस, स्कूल, हॉस्पिटल के आरक्षित क्षेत्र में की जाएगी, लेकिन न्यूनतम 5 प्रतिशत क्षेत्र ओपन स्पेस या पार्क के लिए रखना अनिवार्य होगा.

- किसी योजना में हाईटेंशन लाइन व गैस या पेट्रोल की लाइन जा रही है तो ऐसे हिस्से को ग्रीन क्षेत्र ही माना जाना प्रस्तावित है. 

- अगर यह ग्रीन क्षेत्र बड़ी योजनाओं में 10 प्रतिशत और छोटी योजनाओं में 5 प्रतिशत से अधिक होता है तो जितना अधिक होगा उतनी ही सुविधा क्षेत्र में छूद देना प्रस्तावित है. 

- जिन योजनाओं का कुल क्षेत्रफल 1 एकड़ या इससे कम है और भूखंडों की संख्या 20 या 20 से कम हो तो उनमें मोबाइल टावर के लिए अलग से भूमि आरक्षित रखना जरूरी नहीं होगा. 

- सभी प्रकार के भू उपयोगों के लिए 2 हैक्टेयर तक के क्षेत्रफल के एकल पट्टों के मामलों में 5 प्रतिशत सुविधा क्षेत्र की भूमि की एवज में आवासीय आरक्षित दर के अनुसार राशि वसूलना प्रस्तावित है. 

- किसी योजना का पहुंच मार्ग अनुमोदित योजनाओं में से है और निर्धारित 40 फीट चौड़ाई का पहुंच मार्ग उपलब्ध कराना संभव नहीं हो तो निकाय अपने स्तर पर पहुंच मार्ग 30 फीट रखने की स्वीकृति दे सकेंगे. 

- ऐसी ग्रुप हाउसिंग और टाउनशिप योजनाएं जो गेटेड कम्युनिटी के तौर पर विकसित की गई हों, उनमें विभिन्न चौड़ाई की सड़कों की व विभिन्न क्षेत्रफल के भूखंडों पर भवन निर्माण की स्वीकृति मुख्य सड़क की चौड़ाई के अनुसार दिया जाना प्रस्तावित है. 

- ऐसे मामलों में आधारभूत सुविधाओं का विकास योजना क्षेत्र में प्रस्तावित इकाईयों के अनुरूप किया जाना अनिवार्य होगा. 

टाउनशिप योजना का ले आउट प्लान अनुमोदित हो चुका है या अनुमोदित नहीं हुआ है. इन दोनों ही मामलों में कई बार ऐसा होता है कि मास्टरप्लान या जोनल प्लान के तहत प्रस्तावित या स्वीकृत सड़कों की चौड़ाई में बढ़ोतरी हो जाती है. इसके चलते संबंधित विकासकर्ता को और भूमि सड़क के लिए नि:शुल्क समर्पित करना जरूरी हो जाता है. ऐसे मामलों में अपनी भूमि देने वाले विकास कर्ता को किस तरह भरपाई की जाए. इस संबंध में भी टाउनशिप नीति में नए व स्पष्ट प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. इसके तहत विकास कर्ता को राहत देने के लिए निकायों के पास कई विकल्प होंगे. विकास कर्ता की पसंद और योजना की स्थिति के अनुसार निकाय इनमें से कई विकल्प का चुनाव कर सकेंगे. आपको बताते हैं कि इस मामले में कौन से विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं-

 

विकासकर्ता को भरपाई के अलग-अलग विकल्प:-

- सड़क की चौड़ाई बढ़ने पर नि:शुल्क समर्पित की जाने वाली भूमि के बदले विक्रय योग्य क्षेत्रफल में निकाय बढ़ोतरी कर सकेंगे. 

- दूसरे विकल्प के तौर पर जितनी जमीन सड़क की चौड़ाई बढ़ने में जाएगी,उतनी जमीन EWS/LIG के क्षेत्रफल में कम की जा सकेगी. 

- तीसरे विकल्प के अनुसार सुविधा क्षेत्र में भी छूट दी जा सकेगी, लेकिन न्यूनतम 5 प्रतिशत भूमि ओपन स्पेस या पार्क के लिए रखना जरूरी होगा. 

- चौथे विकल्प के तहत जितनी भूमि सड़क के लिए दी जाएगी,उतनी भूमि पर देय बिल्ड एरिया रेश्यो का लाभ विकासकर्ता को अन्य स्थान पर दिया जा सकेगा. 

- पांचवे विकल्प के तौर पर विकासकर्ता को निकाय की ओर से डेवलपमेंट राइट सर्टिफिकेट भी दिया जाना प्रस्तावित है. 

-विकासकर्ता सड़क की चौड़ाई बढ़ने पर जितनी भूमि समर्पित करेगा उतनी भूमि का इस सर्टिफकेट के माध्यम से विकासकर्ता की खुद की अन्य योजनाओं या अन्य विकासकर्ताओं की योजनाओं के विक्रय योग्य क्षेत्रफल में समायोजन हो सकेगा. 

प्रदेश के शहरों में आधारभूत सुविधाओं वाली टाउनशिप योजनाएं विकसित हों और रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आ सके. इस लिहाज से टाउनशिप नीति में बदलाव की तैयारी की जा रही है. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की मंजूरी के बाद इन प्रस्तावित बदलावों को लागू किया जाएगा.

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