जयपुर Rajasthan: अन्नदाता को मिलेगी राहत ! कृषि विभाग ने बीमित किसानों का करवाया सर्वे, असेसमेंट के आधार पर मिलेगा किसानों को मुआवजा

Rajasthan: अन्नदाता को मिलेगी राहत ! कृषि विभाग ने बीमित किसानों का करवाया सर्वे, असेसमेंट के आधार पर मिलेगा किसानों को मुआवजा

जयपुर: फसल कटाई के समय पिछले माह हुई असामयिक बारिश से प्रदेश में किसानों को खरीफ फसलों में बड़ा नुकसान हुआ है. इस प्राकृतिक आपदा को तो नहीं रोका जा सकता, लेकिन कृषि विभाग मुआवजा देकर किसानों को राहत देने के प्रयास कर रहा है. बड़ी संख्या में किसानों को मुआवजा देने की कवायद की जा रही है. 

इस बार मानसूनी सीजन में बदरा जमकर बरसे हैं. मौसम विभाग के आंकड़ों की मानें तो औसत से करीब 20 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है. लेकिन सितंबर माह के अंतिम दिनों में हुई बारिश ने फसलों को खासा नुकसान पहुंचाया है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह की खरीफ की फसलों में नुकसान हुआ है. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने तुरंत ही फसल बीमा करने वाली कंपनियों को सर्वे कराने के लिए निर्देशित कर दिया था. 

इस दौरान किसानों से भी अपील की गई कि वे फसल में हुए नुकसान की 72 घंटे के अंदर सूचना दें. सूचना देने वाले किसानों का सर्वे कराकर मुआवजा देने की कवायद की जा रही है. कृषि विभाग से जुड़े अधिकृत सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों का बीमा करवाने वाले करीब 3 लाख किसानों ने अपनी फसलों में नुकसान की सूचना बीमा कंपनियों व कृषि विभाग के कार्यालयों में दर्ज करवाई है. इन सभी किसानों के फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की प्रक्रिया की जा रही है. इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में बारिश तेज होने से जलभराव के चलते फसलों में नुकसान हुआ है, वहां मिड सीजन एडवर्सिटी प्रक्रिया के तहत मुआवजा दिलाया जा रहा है.

खरीफ फसल में 6 जिलों में मिड सीजन एडवर्सिटी लागू:-
- प्रदेश के 6 जिलों के 319 पटवार मंडलों में फसलों का नुकसान
- बारां के 43 पटवार मंडलों में में सोयाबीन, उड़द, मक्का का नुकसान
- बूंदी के 59 पटवार मंडलों में सोयाबीन, उड़द, मक्का का नुकसान
- कोटा के 141 पटवार मंडलों में सोयाबीन और उड़द का नुकसान
- टोंक के 63 पटवार मंडलों में मूंग और उड़द का नुकसान
- करौली के 1 पटवार मंडल में तिल का नुकसान
- धौलपुर के 12 पटवार मंडलों में बाजरा का नुकसान

इस बार प्रदेश में समय पर मानसूनी बारिश आने से खरीफ फसलों की बुवाई रिकॉर्ड हुई थी. करीब 164 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई की गई थी. इसमें भी करीब 45 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में बाजरा की बुवाई हुई थी. हालांकि जब बाजरा, ज्वार, मक्का जैसी फसलों की कटाई होनी शुरू हुई थी, तभी बरसात होने से बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान हुआ है. पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, करौली, अलवर, दौसा आदि जिलों में बाजरा की फसल की कटाई के बाद नुकसान हुआ है. ऐसे सभी बीमित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि जिन किसानों का बीमा नहीं था, उन्हें कोई सहारा नहीं मिल पा रहा है. 

कृषि विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटियों के जरिए जो सर्वे राजस्व विभाग करवा रहा है, उनमें मुआवजा देने की कवायद भी जारी है. वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बीमित किसानों को भी मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है. कुल मिलाकर कृषि विभाग का प्रयास है कि फसल नुकसान वाले अधिक से अधिक किसानों को मुआवजा दिलवाया जाए, जिससे कि प्राकृतिक आपदा से लुटा-पिटा महसूस कर रहे अन्नदाता को कुछ राहत मिल सके. 

और पढ़ें